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NASA Alert: आसमान से आ रही है आफत! इस दिन धरती के करीब से गुजरेगा एस्टेरॉयड, नासा ने जारी किया अलर्ट

Asteroid Hitting Earth: धरती की तरफ तेजी से एक एस्टेरॉयड आ रहा है। नासा के मुताबिक, यह 15 सितंबर, 2024 को पृथ्वी के बेहद करीब से गुजर सकता है। एस्टेरॉयड का आकार 720 फुट बताया गया जो करीब दो फुटबॉल मैदान जितना है। नासा के वैज्ञानिक इस पर अपनी नजर बनाए हुए हैं

Jitendra Singhअपडेटेड Sep 05, 2024 पर 11:08 AM
NASA Alert: आसमान से आ रही है आफत! इस दिन धरती के करीब से गुजरेगा एस्टेरॉयड, नासा ने जारी किया अलर्ट
Asteroid Hitting Earth: वर्चुअल टेलीस्कोप प्रोजेक्ट के मुताबिक, पृथ्वी के इतने नजदीक आने वाले एस्टेरॉयड लगभग हर 10 साल में एक बार आते हैं।

काफी लंबे समय से एस्टेरॉयड को पृथ्वी के लिए खतरा बताया जाता है। अगर धरती से एस्टेरॉयड टकराता है, तो तबाही मच सकती है। बताया जाता है कि एक बार पृथ्वी से एस्टेरॉयड की टक्कर हुई थी। जिसके बाद डायनासोर खत्म हो गए थे। इसके बाद कई बार पृथ्वी के पास से गुजरने वाले एस्टेरॉयड के टकराने की आशंका जताई गई है, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ। अब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक विशाल एस्टेरॉयड को लेकर अलर्ट जारी किया है। नासा ने कहा है कि एस्टेरॉयड तेजी से पृथ्वी के नजदीक से गुजरेगा। 720 फुट का यह बड़ा एस्टेरॉयड 15 सितंबर, 2024 को पृथ्वी के बेहद करीब से गुजर सकता है।

नासा के वैज्ञानिक अस पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। कहा जा रहा है कि यह पृथ्वी से करीब 620,000 मील की दूरी से गुजरने वाला है। हालांकि यह दूरी बहुत ज्यादा लग सकता है। लेक्न खगोलीय दृष्टिकोण से यह बेहद कम दूरी है। पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी का यह सिर्फ 2.6 गुना है। खुशी की बात ये है कि इसके पृथ्वी से टकराने का कोई खतरा नहीं है।

यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना है

वर्चुअल टेलीस्कोप प्रोजेक्ट (Virtual Telescope Project) के मुताबिक, पृथ्वी के इतने करीब से एस्टेरॉयड करीब हर 10 साल में एक बार आते हैं। यह उत्तरी गोलार्ध में दिखाई देगा। 15 सितंबर को दोपहर 2:30 बजे से यह खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। लोग वर्चुअल टेलीस्कोप लाइव फीड देख सकते हैं। अगर आसमान साफ है तो इस एस्टेरॉयड को दूरबीन की मदद से भी देखा जा सकता है। वैज्ञानिक इसकी संरचना (composition), वेग (velocity), घूर्णन अवधि (rotation period) और कक्षीय पथ (orbital path) की स्टडी करेंगे। इस डेटा से वैज्ञानिकों को सौरमंडल की जटिलता को समझने में मदद मिलेगी।

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