पितृ पक्ष का समय बहुत विशेष माना जाता है। इसे श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है। यह पितरों का तर्पण करने के लिए एक अहम समय होता है। पितृ पक्ष 16 दिनों तक चलते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान पितरों का तर्पण करने से उन्हें मोक्ष मिलता है। साल 2024 में 17 सितंबर से पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है। यह पक्ष 2 अक्टूबर को खत्म हो जाएगा। इन दिनों बिहार के गयाजी में विश्व प्रसिद्ध पितृ पक्ष मेला चल रहा है। इस पितृपक्ष में मेले में राजकुमार शर्मा अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ अपने वंशजों का पिंडदान करने आए हैं।
शर्मा ने बताया कि सन 1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान पाकिस्तान में उनके 300 पूर्वजों का कत्लेआम कर दिया गया था। हम उनका पिंडदान करने आए हैं। यह वैसे पूर्वज हैं, जिन्हें देश की आजादी के समय भारत- पाकिस्तान विभाजन की विभीषका में कत्ल कर दिया गया था।
300 पाकिस्तानी पूर्वजों का पिंडदान
राजकुमार शर्मा जब गयाजी पहुंचे तो अपने साथ 300 लोगों की लिस्ट लेकर गए। ये वो लोग, जिनकी 70 साल पहले बंटवारे के समय पाकिस्तान में हत्या कर दी गई थी.। राजकुमार सभी के नाम से पिंडदान कर रहे हैं। शर्मा के साथ उनकी पत्नी सत्या देवी और कुछ अन्य दो-तीन रिश्तेदार भी आए हुए हैं। राजकुमार शर्मा 14 अगस्त 1947 के बाद भारत- पाकिस्तान विभाजन और फिर पाकिस्तान में मचाए गए कत्लेआम की कहानी बताते-बताते उनका गला रूंध गया। वो बार-बार भावुक हो जाते थे। उन्हें कई सालों तक उम्मीद थी कि उनकी पाकिस्तान में वापसी नहीं होगी। लेकिन वहां के हालात बद से बदतर होते चले गए। उनके परिवार के लोग जो बच गए थे। उनके साथ ही रिफ्यूजी बनकर भारत के जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले के डुंगी बरमना गांव में रिफ्यूजी बनकर रह गए।
बूढ़े,बच्चों सबको मार दिया गया – राजकुमार शर्मा
शर्मा ने आगे बताया कि उनके पिता जगत शर्मा, दादा समेत लगभग सभी को मार दिया गया। कुछ बच्चे और बूढ़े लोग बच गए थे। एक भी जवान लड़के लड़कियों को नहीं छोड़ा गया। जवान लड़कों या अन्य जो भी परिवार का मिला, उनको मार दिया गया था। लड़कियों को उठा ले गए थे। विभाजन विभीषिका और पाकिस्तान में कत्लेआम की कहानी सुनाते -सुनाते राजकुमार कई बार भावुक हुए।
राजकुमार ने कैसे निकाला 300 लोगों के नाम
राजकुमार ने बताया कि हमारे पूर्वज 1947 की जंग में कत्लेआम हो गए। उनका 75 साल के बाद रेवेन्यू रिकॉर्ड किसी तरह से निकाला। रेवेन्यू रिकॉर्ड पटवारी से, जमीनी रिकॉर्ड से और कुछ हरिद्वार और गया के पुरोहित के नाम से खोज कर निकाला गया। इनकी कुल संख्या 300 है। इनका पिंडदान नहीं हुआ था। ये सभी पाकिस्तान में कत्लेआम में मार दिए गए थे। राजकुमार शर्मा ने बताया कि 1947 में जो हुआ, जो हमें बताया गया, उसे याद कर आज भी हमारी रूह कांप जाती है।