चिटफंड घोटाला मामले में पीड़ितों को पैसा लौटाएगी सरकार, ED ने जब्त की ₹3,339 करोड़ की संपत्ति

Ponzi scheme victims: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने घोषणा की है कि उसने एग्री गोल्ड ग्रुप ऑफ़ कंपनीज की पोंजी योजनाओं के पीड़ितों को 3,339 करोड़ रुपये की संपत्ति वापस करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। जांच एजेंसी के उन कंपनियों की चल -अचल संपत्तियों को अटैच करने के बाद उसके पैसे को लौटाने का काम कर रही है

अपडेटेड Feb 25, 2025 पर 5:57 PM
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Ponzi scheme victims: एग्री गोल्ड समूह की कंपनियों द्वारा शुरू की गई पोंजी स्कीम यानी चिटफंड घोटाले को अंजाम दिया गया था

Ponzi scheme victims: पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई राज्यों में एक भाषण देते हुए देशवासियों को दिलासा दिलाया था कि जिन लोगों के पैसों को चिटफंड के जरिए ठग लिया गया उन पैसों को आरोपियों के जेब से हम निकालकर उन आम लोगों को लौटाएंगे जो पीड़ित हैं। उन्होंने कहा था कि इस मामले में हमारी सरकार का भरपूर प्रयास रहेगा। अब वो भागीरथ प्रयास का असर दिखने लगा है। केंद्रीय जांच एजेंसी ED यानी प्रवर्तन निदेशालय ने एक बड़ी कार्रवाई की है।

एग्री गोल्ड ग्रुप की कंपनियों द्वारा शुरू की गई पोंजी स्कीम यानी चिटफंड कंपनियों के मार्फत जिस तरह कई राज्यों में लाखों लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया था। अब जांच एजेंसी के द्वारा उन कंपनियों की काफी चल -अचल संपत्तियों को अटैच करने के बाद उसके पैसे को लौटाने का काम कर रही है।

ED की हैदराबाद स्थित जोनल ऑफिस के द्वारा इस मामले में पोंजी योजनाओं के पीड़ितों को लगभग 3,339 करोड़ रुपये की कुर्क संपत्तियों की वापसी की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। हालांकि जांच एजेंसी के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि आरोपियों की उस कुर्क संपत्तियों का आज की तारीख में बाजार मूल्य करीब 6,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। इसका मतलब साफ है की जितने पैसों का चिटफंड घोटाला किया गया था। करीब -करीब उतने पैसों को जांच एजेंसी के द्वारा जब्त कर लिया गया है।


6,380 करोड़ का है चिटफंड घोटाला

जांच एजेंसी के मुताबिक, एग्री गोल्ड समूह की कंपनियों द्वारा शुरू की गई पोंजी स्कीम यानी चिटफंड घोटाले को अंजाम दिया गया था। इस मामले में आरोपियों के द्वारा आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्, तमिलनाडु सहित कुल 9 राज्यों में चिटफंड घोटाला को अंजाम दिया गया था। इस घोटाले के अंतर्गत लोगों को इन्वेस्ट के बदले उसके निवेश वाली रकम से कई गुणा ज्यादा पैसे देने का झूठा आश्वासन दिया जाता था।

जब तक लोगों को इस मामले की समझ आती थी, तब तक वो चिटफंड कंपनी भाग जाती थी या अपने आप को दिवालिया घोषित कर देती थी। इस एग्री गोल्ड ग्रुप की कंपनियों द्वारा शुरू की गई पोंजी स्कीम के तहत करीब 32 लाख से ज्यादा लोगों को पैसे निवेश करवाने के नाम पर उन्हें ठगे गए। ED के अनुसार इस साजिश के लिए एग्री गोल्ड ग्रुप के अववा वेंकट रामा राव के परिवार के कई सदस्यों की भूमिका संदिग्ध है।

वहीं, शुरुआती जांच में ही उसके सातों भाइयों का नाम इस घोटाले में जुड़ते हुए दिखाई दे रहे थे। जांच एजेंसी की तफ्तीश में ये भी जानकारी मिली की एग्री गोल्ड पोंजी घोटाला मामले को अंजाम देने से पहले करीब 150 से ज्यादा शैल कंपनियों बनाई। फिर उसके मार्फत उन करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया।

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अटैच की गई संपत्तियों की लिस्ट

इस मामले में ईडी के द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में 2300 से अधिक कृषि जमीन, आवासीय, कमर्शियल भूखंड और अपार्टमेंट के साथ -साथ आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में हैलैंड नाम के एक मनोरंजन पार्क भी शामिल है। इसके साथ ही कुर्क की कई कुल 2,310 अचल संपत्तियों में से 2,254 आंध्र प्रदेश में, 43 तेलंगाना में,11 कर्नाटक और 2 ओडिशा में है।

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