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Rajasthan: फांसी के फंदे से बची महिला, लेकिन एंबुलेंस ने ले ली जान, कांच तोड़कर निकाला शव

Rajasthan News: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। एक महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या की कोशिश की। लेकिन जब देखा गया कि अभी सांस चल रही है। फौरन एंबुलेंस से अस्पातल ले जाया गया। फिर एंबुलेंस का गेट लॉक हो गया। महिला को काफी देर बाद कांच तोड़कर बाहर निकाला गया। तब तक डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 20, 2025 पर 2:46 PM
Rajasthan: फांसी के फंदे से बची महिला, लेकिन एंबुलेंस ने ले ली जान, कांच तोड़कर निकाला शव
Rajasthan News: एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर काम नहीं कर रहा था। वहीं गेट लॉक होने से महिला की मौत हो गई।

राजस्थान के भीलवाड़ा में हैरान करने वाली घटना का खुलासा हो हुआ है। यहां राजकीय महात्मा गांधी अस्पताल के बाहर एक महिला मरीज को लेकर आई एंबुलेंस का गेट लॉक हो गया। इसके बाद जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने महिला की मौत पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जोरदार हंगामा खड़ा कर दिया। महिला के बेटे ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस का गेट लॉक होने के कारण उसकी मां की मौत हुई है। घटना प्रतापनगर इलाके में सुबह 10:30 बजे हुई। इसका वीडियो भी सामने आया है। जिसमें महिला के परिजन एंबुलेंस का गेट खोलने का प्रयास कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर भी नहीं था।

महिला के परिजनों ने एंबुलेंस का गेट खोलने के लिए काफी देर तक मशक्कत की। बाद में उन्होंने कांच तोड़कर उसे बाहर निकालना चाहा लेकिन तब तक उसकी जान जा चुकी थी। दरवाजे में गड़बड़ी के अलावा परिजनों का यह भी आरोप था कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था। इसके साथ ही एंबुलेंस का ड्राइवर रास्ता भी भूल गया था। जिससे अस्पताल पहुंचने में काफी देरी हुई।

महिला ने फांसी लगाकर की आत्महत्या की कोशिश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुलेखा देवी(43) पत्नी प्रशांत कुमार की मौत हुई है। महिला के बेटे गौरव ने बताया कि मैं संडे होने के कारण आज देर तक सो रहा था। फोन बजने पर मैं उठा तो मां सुलेखा देवी को फांसी के फंदे पर झूलता हुआ देखा। छोटे भाई रवि और पापा ने फंदे से उतारकर एंबुलेंस की सहायता से हॉस्पिटल के लिए रवाना हुए। मां की सांसें चल रही थी। एंबुलेंस में मां को ऑक्सीजन देने की कोशिश की गई, लेकिन ऑक्सीजन का सिलेंडर खराब था। इससे मां को ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं मिल सका। एंबुलेंस का ड्राइवर भी रास्ता भूल गया। वह महात्मा गांधी अस्पताल लाने की बजाय 3 किलोमीटर दूर एक दूसरे गांव में ले गया। फिर अस्पताल लेकर पहुंचा, जिससे आने में करीब 20 मिनट की देरी हो गई।

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