Russia-Ukraine War: जानिए कैसे पंजाब के गेहूं व्यापारियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है रूस-यूक्रेन युद्ध

रूस-यूक्रेन युद्ध पंजाब के गेहूं व्यापारियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, पंजाब के गेहूं व्यापारियों को इससे कुछ उम्मीद बंध रही है

अपडेटेड Mar 09, 2022 पर 12:17 PM
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दुनिया में 40 फीसदी गेहूं का निर्यात रूस और यूक्रेन करते हैं

Russia-Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का आज (बुधवार) 14वां दिन है। इस जंग से इन दोनों देशों को तो नुकसान हो ही रहा है, लेकिन इससे पूरी दुनिया पर जो महंगाई बम फूटा है, उससे कोई भी देश अछूता नहीं है। कच्‍चे तेल की बढ़ती कीमतें पहले ही महंगाई की आग में घी डालने का काम कर रही थीं, अब रूस पर आए नए कड़े प्रतिबंधों से अब दुनियाभर के कारोबार को भी अपनी जद में ले लिया है।

किसानों और व्यापारियों को मिलेंगे सही दाम

इन सबके बीच रूस-यूक्रेन युद्ध पंजाब के गेहूं व्यापारियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। जी हां, पंजाब के गेहूं व्यापारियों को इससे कुछ उम्मीद बंध रही है। दरअसल, रूस और यूक्रेन दुनिया में 40 प्रतिशत गेंहू की सप्लाई करते हैं। ऐसे में पंजाब के कारोबारियों को लगता है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा तो भारत के गेहूं की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ेगी, जिससे किसानों और व्यापारियों को सही दाम मिलेंगे।


2019 के आंकड़ों के मुताबिक रूस दुनिया में सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक देश था। वहीं, युद्धग्रस्त यूक्रेन इस मामले में पांचवें नंबर पर था। न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में 40 फीसदी गेहूं का निर्यात यही दो देश करते हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो दोनों देशों से गेहूं के निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इस स्थिति में भारत गेहूं का बड़ा निर्यातक देश बन सकता है।

युद्ध के बाद बढ़ सकती है भारत के गेहूं की मांग

पंजाब में सबसे अच्छी क्वालिटी की गेहूं की उपज होती है लेकिन उसका निर्यात सिर्फ श्रीलंका और बांग्लादेश तक ही सीमित है। यहां तक कि भारत में भी बड़ी-बड़ी कंपनियां रूस और यूक्रेन की गेहूं की ओर निगाहें रखती हैं, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि इस युद्ध के बाद भारत के गेहूं की मांग बढ़ सकती है। पंजाब के खन्ना सिटी में एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी है, लेकिन पिछले कुछ समय से यह वीरान पड़ा है। यहां खरीददार बहुत कम ही पहुंच रहे हैं। लेकिन आजकल यहां के किसान और व्यापारी रूस-यूक्रेन युद्ध पर टकटकी लगाए हुए हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध से बंधी हैं उम्मीद

खन्ना सिटी में गेहूं ट्रेडर्स एसोशिएसन के अध्यक्ष हरबंश सिंह रोशा (Harbans Singh Rosha) ने News18.com को बताया कि युद्ध की वजह से हम बहुत परेशानी में हैं। कांडला पोर्ट पर जितनी भी गेहूं जाती है उनमें से ज्यादातर सहारनपुर और मध्य प्रदेश की होती हैं। पंजाब में अच्छी क्वालिटी की गेंहू होने के बावजूद इसका खरीददार नहीं है।

उन्होंने कहा कि MSP (minimum support price) बहुत कम है। हमारे पास अभी भी 40 लाख टन गेहूं का भंडार पड़ा है। फसल कटने के बाद यह 200 लाख टन हो जाएगा, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध से हमें कुछ उम्मीदें बंधी हैं। सूत्रों ने बताया कि बड़े खरीददार अडाणी और आईटीसी ने व्यापारियों से बात करनी शुरू कर दी है।

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किसानों के राजनीतिक संगठन संयुक्त समाज मोर्चा (SSM) के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल (Balbir Singh Rajewal) ने कहा कि हां, यह सही है कि यह युद्ध व्यापारियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है लेकिन किसानों के लिए नहीं। किसानों के लिए एमएसपी की अच्छी दर ही महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि पंजाब की नई सरकार इस बात को समझेगी, क्योंकि युद्ध लंबे समय तक चलने वाला है और अप्रैल में फसल कटेगी। ऐसे में हमें मुनाफे को देखना चाहिए।

व्यापारियों को चुनाव नतीजों का बेसब्री से इंतजार

खन्ना के व्यापारियों को 10 मार्च को घोषित होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजों का बेसब्री से इंतजार है। एग्जिट पोल ने संकेत दिया है कि आम आदमी पार्टी (AAP) सत्तारूढ़ कांग्रेस को बाहर कर सकती है। ऐसे में व्यापारियों ने अपनी मांग के साथ नए मुख्यमंत्री से मिलने की योजना बनाई है। रोशा ने कहा कि गुजरात, यूपी और एमपी का गेहूं सस्ता है, क्योंकि वहां टैक्स कम है। हमें उम्मीद है कि नए मुख्यमंत्री टैक्स में कटौती करेंगे ताकि निजी व्यापारी प्रतिस्पर्धी दरों पर बिक्री कर सकें।

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