सिंगापुर की फैशन टेक कंपनी जिलिंगो (Zilingo) की को-फाउंडर Ankiti Bose ने बिना बोर्ड की मंजूरी लिए अपनी सैलरी 10 गुना बढ़ा लिया था। वित्तीय अनियमितताओं के चलते पिछले साल को-फाउंडर बोस को कंपनी के सीईओ का पद छोड़ना पड़ा था और अपनी ही कंपनी से उन्हें निकलना पड़ा। अब Inc42 की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उन्होंने कंपनी के बोर्ड से मंजूरी लिए बिना ही अपनी सैलरी में 10 गुना इजाफा कर दिया था। यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आया है, जब 31 वर्षीय बोस ने निवेशक महेश मूर्ति के खिलाफ 10 करोड़ डॉलर (820 करोड़ रुपये) का मानहानि केस दायर किया हुआ है।
महेश मूर्ति ने उनके खिलाफ स्टार्टअप से गलत तरीके से पैसे लेने का आरोप लगाया है। बोस के मुताबिक सीईओ पद से हटाने के लिए उनके खिलाफ साजिश की गई और इसने उनके और उनके परिवार के लिए खतरा पैदा कर दिया है। कंपनी ने पिछले साल कहा था कि फर्म के अकाउंट्स में हेराफेरी को लेकर बोस को निकालने का फैसला बोर्ड ने लिया था और इसमें किसी इंडिविजुअल निवेशक की कोई भूमिका नहीं है।
Ankiti Bose ने कब ली ज्यादा सैलरी और किसे-किसे मिला फायदा
रिपोर्ट के मुताबिक 2017 और 2019 के बीच बोस ने खुद को, को-फाउंडर ध्रुव कपूर और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर आदि वैद्य की सैलरी में बेतहाशा इजाफा किया। बोस की सैलरी 2017 में 5500 सिंगापुरियन डॉलर थी जो 2019 में बढ़कर 58900 सिंगापुरियन डॉलर हो गई यानी करीब 10 गुना का इजाफा। वहीं कपूर की सैलरी इस दौरान तीन गुना और वैद्य की सैलरी 7 गुना बढ़ी।
Zilingo के बारे में डिटेल्स
जिलिंगो में सिकोइया कैपिटल इंडिया (Sequoia Capital India) और टेमासेक होल्डिंग्स (Temasek Holdings) ने पैसा लगाया हुआ है। सिकोइया कैपिटल से 22.6 करोड़ डॉलर का फंड जुटाने के बाद पिछले साल अप्रैल 2022 में यह यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो गई। इस कंपनी की शुरुआत 23 वर्षीय Ankiti Bose और Dhruv Kapoor ने वर्ष 2015 में किया था। इसका लक्ष्य दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के छोटे कारोबारियों को अपना सामान ऑनलाइन बेचने में मदद करना था। यह बी2बी स्टार्ट-अप फैशन रिटेलर्स को होलसेल सप्लाई करती है।