22 साल बाद विजय निकला जुबैर, 15 साल की लड़की का किया था अपहरण, अब पुलिस ने पकड़ा

Saharanpur News: सहारनपुर में पुलिस ने 22 साल पुराने अपहरण मामले में जुबैर को गिरफ्तार किया, जिसने अपनी पहचान बदलकर देहरादून में विजय पुंडीर के नाम से LIC एजेंट का काम किया। 2002 में 15 वर्षीय नाबालिग को भगाने का आरोप था, और वह कई सालों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा

अपडेटेड Dec 04, 2024 पर 2:25 PM
सहारनपुर पुलिस ने हिंदू नाबालिग लड़की को भगाने वाले आरोपी को पकड़ा।

सहारनपुर की इस घटना ने 22 साल पुराने मामले को फिर से सामने ला दिया, जिसमें पुलिस ने हिंदू नाबालिग लड़की को भगाने के आरोपी जुबैर को गिरफ्तार किया। जुबैर ने अपनी पहचान बदलकर देहरादून में "विजय पुंडीर" के नाम से जीवन बिताया और 10वीं और 12वीं की फर्जी मार्कशीट, आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए LIC एजेंट के रूप में काम करने लगा। 2002 में लड़की के पिता ने गागलहेड़ी थाने में जुबैर पर अपहरण का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने कई वर्षों की खोजबीन के बाद जुबैर को गिरफ्तार कर मामले को अंजाम तक पहुंचाया।

आरोपी जुबैर को पकड़ने के लिए पुलिस ने कई प्रयास किए, लेकिन वह फरार रहा। आखिरकार, 22 साल बाद, उसे देहरादून के पटेल नगर इलाके से गिरफ्तार किया गया।

क्या है पूरा मामला?


उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने हिंदू समुदाय की नाबालिग लड़की को भगाकर ले जाने के आरोपी को 22 साल के बाद गिरफ्तार कर लिया है। इस दौरान उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए 10वीं और 12वीं की फर्जी मार्कशीट, आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए। इन दस्तावेजों के जरिए वह सामान्य जीवन जीता रहा और पुलिस की निगाह से बचता रहा।

नाबालिग को भगाने का आरोप

SP सागर जैन ने बताया कि 16 जून 2002 को जुबैर पर 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को भगाने का आरोप लगा था। इसके बाद से ही वह पुलिस के लिए वांछित था, और उस पर 15,000 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।

पुलिस ने बताया कि जुबैर मूल रूप से हरिद्वार का निवासी है। उसने नाम बदलने के बाद झीबरहेड़ी निवासी बनकर खुद को पेश किया। पटेल नगर में वह पिछले कई साल से रह रहा था और LIC एजेंट के रूप में अपनी पहचान बनाई थी।

दो दशकों के बाद हुई गिरफ्तारी

इस मामले ने यह सवाल भी उठाया कि कैसे एक व्यक्ति इतने लंबे समय तक पहचान छिपाकर समाज में रह सकता है और कानूनी प्रक्रियाओं से बच सकता है। जुबैर की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि यह मामला दो दशकों से लंबित था।

यह घटना न केवल पुलिस की सतर्कता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आधुनिक तकनीक और जांच के तरीकों के बावजूद, अपराधी कभी-कभी वर्षों तक कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों की पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया कितनी खतरनाक हो सकती है।

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