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Sambhal Jama Masjid Violence: संभल जामा मस्जिद मामले में आज सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, जुमे की नमाज को लेकर प्रशासन अलर्ट

Sambhal Jama Masjid Dispute: उत्तर प्रदेश के संभल की जामा मस्जिद में सर्वे और हिंसा का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। आज (29 नवंबर 2024) चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार की पीठ मामले की सुनवाई करेगी। संभल की जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 29, 2024 पर 9:37 AM
Sambhal Jama Masjid Violence: संभल जामा मस्जिद मामले में आज सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, जुमे की नमाज को लेकर प्रशासन अलर्ट
Sambhal Jama Masjid Dispute: संभल में स्थानीय कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया गया था कि जिस जगह पर जामा मस्जिद है। वहां पहले कभी हरिहर मंदिर था।

जामा मस्जिद कमेटी ने निचली अदालत के सर्वे के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच सुनवाई करेगी। संभल मस्जिद विवाद मामले पर शाही जामा मस्जिद कमेटी की याचिका पर आज (29 नवंबर 2024) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। मुस्लिम पक्ष ने निचली अदालत के फैसले पर तुंरत रोक लगाने की मांग की है। संभल की जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में निचली अदालत के मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण कराने के आदेश को चुनौती दी है।

याचिका में कहा गया है कि ये असाधारण मामला है। इसलिए अदालत निचली कोर्ट के फैसले पर तत्काल रोक लगाए। उत्तर प्रदेश के संभल जिले की जामा मस्जिद का सर्वे करने के लिए टीम गई थी। जिसके बाद हिंसा भड़क उठी थी।

याचिका में किया गया यह दावा

मस्जिद कमेटी ने अपनी याचिका में कहा, 19 नवंबर को मस्जिद के हरिहर मंदिर होने का दावा करने वाली याचिका संभल कोर्ट में दाखिल हुई थी। उसी दिन सिविल जज, सीनियर डिवीजन ने मामले को सुना और बिना मस्जिद कमेटी का पक्ष सुने सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर दिया। एडवोकेट कमिश्नर सर्वे के लिए 19 नवंबर की शाम पहुंच भी गए। 24 नवंबर को फिर सर्वे हुआ। जिस तेजी से सारी चीजें हुईं, उससे लोगों में शक फैल गया और वे अपने घर से बाहर निकल आए। भीड़ के उग्र हो जाने के बाद पुलिस फायरिंग हुई और 6 लोगों की मौत हो गई। याचिका में दावा किया गया है कि शाही जामा मस्जिद 16वीं सदी से वहां है। इतनी पुरानी धार्मिक इमारत के सर्वे का आदेश प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट और प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल कानून के खिलाफ है।

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