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धरती नहीं समुद्र में पाई जाती है यह गाय, बेहद शांत स्वभाव, अब विलुप्त होने के कगार पर

भारत में गायों को मां का दर्जा दिया गया है। इन्हें गौ माता के रूप से जाना जाता है। गांवों के ज्यादातर परिवार गाय के पालन को ही तरजीह देते हैं। गायें बेहद शांत स्वभाव की होती है। एक ऐसी ही गाय के बारे में हम बता रहे हैं। ये गाय धरती पर नहीं बल्कि समुद्र में पाई जाती है। इस गाय को सी काऊ कहा जाता है

Jitendra Singhअपडेटेड Sep 23, 2024 पर 4:58 PM
धरती नहीं समुद्र में पाई जाती है यह गाय, बेहद शांत स्वभाव, अब विलुप्त होने के कगार पर
सी काऊ पूरी तरह से शुद्ध शाकाहारी और स्तनधारी जीव है।

भारत में रहने वाले हिंदुओं के लिए गाय एक पवित्र जीव है। इसे भारत में मां का दर्जा मिला हुआ है। इसलिए गौ माता कहते हैं। लेकिन आज हम धरती पर रहने वाले गाय की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि उस गाय की बात कर रहे हैं जो समुंदर के भीतर पाई जाती है। यह गाय भी बेहद शांत स्वभाव की है। शुद्ध शाकाहारी और स्तनझारी जीव है। इसे सी काऊ (Sea Cow) के नाम से जाना जाता है। इसे पूरे समुद्र का सबसे शरीफ जीव माना जाता है। ये जीव किसी पर कभी भी हमला नहीं करता है। अब इन गायों का अस्तित्व खतरे में आ गया है।

समुद्री गाय की चार प्रजातियां हैं। इसमें मैनाटी की तीन प्रजातियां हैं और डुगोंग की एक प्रजाति है। इन गायों का मुख्य भोजन समुद्र में उगने वाली घास है। ये गाय किसी पर भी हमला नहीं करती हैं। सी काऊ का दूसरा नाम साइनेरिया है। 18वी शताब्दी में सी काऊ की स्टेलर नाम की प्रजाति विलुप्त हो चुकी है। इसका स्वभाव बहुत ही दोस्ताना होता है।

कैसे होते हैं ये जीव

देखने में ये जीव आपको समुद्री सील की तरह लगेंगे। हालांकि ये उनसे काफी अलग होते हैं। इनकी उम्र 50-60 साल तक है। विज्ञान की भाषा में इसे मैनाटी कहते हैं। ये 12 से 14 महीने अपनी मां के गर्भ में रहते हैं। इसके बाद पानी के अंदर ही जन्म लेते हैं। इन जीवों के गले में कुल 6 हड्डियां होती हैं। इनकी गर्दन पूरे शरीर के मुकाबले छोटी होती है। आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर इन जीवों को बाएं या फिर दाहिने देखना पड़े तो उन्हें इसके लिए पूरा शरीर मोड़ना पड़ता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इनका DNA हाथी से ज्यादा मिलता-जुलता है। कहा जाता है कि पहले ये धरती पर रहते थे। तब इनके चार पैर थे। ये आम गाय की तरह घास खाकर रहती थी। बाद में इन्हें पानी रहने के लिए अपने आपको विकसित करना पड़ा।

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