डूब चुके Silicon Valley Bank को मिला खरीदार, Elon Musk ने कहा-मैं इसे खरीदने को तैयार

Tesla के सीईओ एलॉन मस्क ने कहा है कि वह सिलिकॉन वैली बैंक को खरीदने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा है कि वह इसे डिजिटल बैंक बनाएंगे। इस बारे में उन्होंने ट्वीट किया है। उनके ट्वीट के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं

अपडेटेड Mar 11, 2023 पर 6:31 PM
2008 में वॉशिंगटन म्यूचुअल के डूबने के बाद पहली बार इतना बड़ा बैंक अमेरिका में डूबा है।

Silicon Valley Bank को भले ही रेगुलेटर्स ने ध्वस्त घोषित कर दिया है, लेकिन इसके लिए एक खरीदार आ चुका है। इस खरीदार का नाम है Elon Musk, जो दुनिया का सबसे अमीर शख्स है। Tesla के सीईओ ने कहा है कि वह सिलिकन वैली बैंक को खरीदने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वह इसे डिजिटल बैंक बनाएंगे। दरअसल, सिलिकॉन वैली बैंक के डूबने की खबर आने के बाद Razer के को-फाउंडर Min-Liang Tan ने एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने उन्होंने कहा था कि Twitter को एसवीबी को खरीद लेना चाहिए और इसे एक डिजिटल बैंक में बदल देना चाहिए।

Elon Musk ने पिछले साल Twitter का अधिग्रहण किया था

एलॉन मस्क ने इस ट्वीट का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि मैं इस आइडिया के लिए तैयार हूं। पिछले साल दुनिया के इस सबसे अमीर शख्स ने सोशल मीडिया साइट Twitter का अधिग्रहण किया था। यह डील 44 अरब डॉलर में हुई थी। उनका विजन ट्विटर को 'एवरीथिंग ऐप' बनाने का है। उन्होंने इस माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म की इनकम बढ़ाने का आइडिया पेश किया।


मस्क की ट्वीट के निकाले जा रहे कई मतल

SVB क्राइसिस के बीच मस्क की टिप्पणी के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि मस्क की ट्वीट उनके प्लान को लेकर उनकी गंभीरता दिखाती है। दरअसल, मस्क पहले भी ट्विटर को पेमेंट प्लेटफॉर्म बनाने की बात कर चुके हैं। उधर, SVB की पहचान स्टार्टअप्स की फाइनेंसिंग में रही है। यह एसेट के लिहाज से अमेरिका का 16वां सबसे बड़ा बैंक था। 2022 के अंत में इसका एसेट 209 अरब डॉलर था। इसके पास 175.4 अरब डॉलर का डिपॉजिट था।

2008 के बाद पहली बार डूबा इतना बड़ा बैंक

2008 में वॉशिंगटन म्यूचुअल के डूबने के बाद पहली बार इतना बड़ा बैंक अमेरिका में डूबा है। इसे अमेरिका में रिटेल बैंक के डूबने का दूसरा सबसे बड़ा मामला माना जा रहा है। अचानक सिलिकॉन वैली बैंक के डूबने की खबर ने मार्केट के हिला दिया है। एसवीबी की समस्या तब और बढ़ गई, जब डिपॉजिटर्स ने अचानक पैसे निकालने शुरू कर दिए। इंटरेस्ट रेट्स ज्यादा बढ़ने की वजह से सिक्योरिटीज की वैल्यू बहुत गिर गई। इससे एसवीबी की पेरेंट कंपनी को सिक्योरिटीज को बेचने से बहुत लॉस हुआ।

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