फोन से मैसेज या कॉल हिस्ट्री डिलीट करना अपराध है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दिया यह जवाब

आमतौर पर बहुत से लोग मोबाइल में मैसेज ज्यादा होने की वजह से डिलीट कर देते हैं। इसके साथ ही लोग कॉल हिस्ट्री भी डिलीट कर देते हैं। ऐसे में बहुत से लोगों को यह भ्रम रहता है कि डिलीट करना कहीं अपराध की श्रेणी में तो नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुना दिया है। आइये जानते हैं सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है

अपडेटेड Aug 29, 2024 पर 2:22 PM
सुप्रीम कोर्ट ने मैसेज डिलीट करने के मामले में फैसला सुनाया है। जिसे हर मोबाइल यूजर्स को पता होना चाहिए।

स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। यह चलता फिरता बैंक, शॉपिंग हब की तरह काम करता है। इसके बिना जिंदगी अधूरी लगती है। वहीं जब कहीं कुछ भी अपराध होता है तो पुलिस सबसे पहले मोबाइल चेक करती है। इसकी वजह ये है कि मोबाइल से बड़े से बड़े राज खुल जाते हैं। ऐसे ही बहुत से लोग अपने मोबाइल फोन से मैसेज और कॉल हिस्ट्री डिलीट करते रहते हैं। इसे मजबूरी में करना पड़ता है या फिर किसी अन्य कारण से ऐसा करना पड़ता है। लिहाजा हर मोबाइल यूजर्स को यह जानकारी होना बेहद जरूरी है कि मोबाइल से मैसेज या कॉल हिस्ट्री डिलीट करना अपराध है या नहीं।

दरअसल, देश के करोडों मोबाइल फोन यूजर्स की इस दुविधा को सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दूर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि फोन से मैसेज डिलीट करना कोई अपराध नहीं है। आज कल यूजर्स तेजी से मोबाइल फोन बदलते रहते हैं। वहीं मोबाइल फोन को समय-समय पर अपग्रेड करने की वजह से भी फोन से मैसेज, कॉल आदि डिलीट हो जाते हैं। ऐसे में इसे एक अपराध नहीं माना जा सकता है।

मोबाइल फोन प्राइवेट है – सुप्रीम कोर्ट


एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बी आर और केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि मोबाइल को समय-समय पर अपग्रेड किया जाता है। जिससे पुराने मैसेज डिलीट हो सकते हैं। कोर्ट ने मोबाइल फोन को प्राइवेट चीज माना है। ऐसे में फोन में प्राइवेसी की वजह से भी मैसेज और अन्य चीजों को डिलीट कर दिया जाता है। इसके अलावा फोन में ज्यादा फोटो, वीडियो और मैसेज होने की वजह से फोन स्लो हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि इसे अपराध की श्रेणी और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता है। हालांकि, आईटी एक्ट के तहत सोशल मीडिया के लिए रेगुलेशन बनाए गए हैं। जिसके तहत भारतीय संविधान के धाराओं के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है।

मोबाइल फोन को लेकर नियम

भारत में मोबाइल फोन को अलग से कोई नियम नहीं है। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में आईटी एक्ट में बदलाव करके नए नियम को जोड़ा गया है। आईटी एक्ट में खासतौर पर सोशल मीडिया के लिए रेगुलेशन हैं, जबकि मोबाइल फोन के लिए भारतीय संविधान के धाराओं के हिसाब से कार्रवाई की जाती है।

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