बिजली से करंट लगना आम है, लेकिन कभी-कभी इंसान को छूने से झटका महसूस होना एक दिलचस्प अनुभव है। खासतौर पर सर्दियों में यह अधिक होता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है, जादू नहीं। जब शरीर में इलेक्ट्रॉन्स की संख्या बढ़ती है, तो वह नेगेटिव चार्ज से भर जाता है। यह नेगेटिव चार्ज, किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति के पॉजिटिव चार्ज को आकर्षित करता है। इस प्रक्रिया के दौरान ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है, जिसे करंट के रूप में महसूस किया जाता है।सर्दियों में यह झटका अधिक इसलिए लगता है क्योंकि ठंडी और शुष्क हवा स्थैतिक चार्ज बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा देती है।
ऊनी कपड़ों, नायलॉन या मेटल की चीजों को छूने पर करंट महसूस होने की संभावना बढ़ जाती है। यह घटना पूरी तरह से स्थैतिक चार्ज का नतीजा है और किसी भी मौसम में हो सकती है।
क्यों लगता है इंसान को छूने से करंट?
इंसान को छूने से करंट लगने का कारण जादू नहीं, बल्कि विज्ञान है। दरअसल, जब किसी व्यक्ति के शरीर में इलेक्ट्रॉन्स की संख्या बढ़ जाती है, तो उसका शरीर नेगेटिव चार्ज से भर जाता है। नेगेटिव इलेक्ट्रॉन्स अन्य चीजों या व्यक्तियों में मौजूद पॉजिटिव इलेक्ट्रॉन्स को आकर्षित करते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान जब दोनों चार्ज एक-दूसरे से संपर्क में आते हैं, तो ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है, जिसे करंट के रूप में महसूस किया जाता है।
किन चीजों को छूने से करंट लगता है?
कुछ खास चीजें या परिस्थितियां करंट लगने की संभावना को बढ़ा देती हैं। सर्दियों में ऊनी कपड़ों, मेटल की वस्तुओं, नायलॉन या पॉलिएस्टर कपड़ों को छूने से करंट अधिक महसूस होता है। यहां तक कि बालों को छूने पर भी झनझनाहट का एहसास होता है। सर्द मौसम में यह समस्या इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि ठंडी और शुष्क हवा स्थैतिक चार्ज को बढ़ावा देती है।
सर्दी या गर्मी में करंट क्यों ज्यादा महसूस होता है?
हालांकि इंसान को छूने से करंट साल के किसी भी मौसम में महसूस हो सकता है, लेकिन सर्दियों में यह अनुभव अधिक होता है। ठंडे और शुष्क मौसम में स्थैतिक चार्ज अधिक तेजी से बनता है, जिससे बालों और कपड़ों में झनझनाहट या करंट जैसा एहसास होता है।
क्या करंट बिजली जैसा तेज होता है?
इंसान के शरीर से महसूस होने वाला यह करंट बिजली के झटके की तुलना में तेज महसूस हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से स्थैतिक चार्ज का नतीजा है। यह प्रक्रिया स्वाभाविक है और इसके पीछे वैज्ञानिक कारण ही जिम्मेदार हैं।