Supertech Twin Tower Demolition: ट्विन टावर गिरने से लोगों की सेहत पर कितना पड़ेगा असर, जानें स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय
Supertech Twin Tower को 28 अगस्त को दोपहर 2.30 बजे धराशायी कर दिया जाएगा। परियोजना के अधिकारियों ने बताया कि 100 मीटर से थोड़ी ज्यादा ऊंची इमारतें 15 सेकंड से भी कम वक्त में ताश के पत्तों से बने घर की तरह ढह जाएंगी
MoneyControl News
अपडेटेड Aug 25, 2022 पर 4:43 PM
15 सेकंड में ताश के पत्तों से बने घर की तरह ढह जाएंगी सुपरटेक के अवैध ट्विन टावर
Supertech Twin Tower Demolition: दिल्ली के कुतुब मीनार से भी ऊंचे नोएडा में स्थित सुपरटेक के अवैध ट्विन टावर 28 अगस्त को ध्वस्त की जाने वाली भारत की सबसे ऊंची इमारतें बन जाएंगी। ट्विन टावर को 28 अगस्त को दोपहर 2.30 बजे धराशायी कर दिया जाएगा। प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने बताया कि 100 मीटर से थोड़ी ज्यादा ऊंची इमारतें 15 सेकंड से भी कम वक्त में ताश के पत्तों से बने घर की तरह ढह जाएंगी।
ध्वस्तीकरण की यह प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से अंजाम दी जाएगी और उसके लिए 3,700 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके ध्वस्तीकरण के बाद सबसे बड़ा सवाल 55,000 टन के मलबे का निस्तारण करने को लेकर पैदा होगा। मुंबई स्थित कंपनी ‘एडिफिस इंजीनियरिंग’ दक्षिण अफ्रीका की अपनी साझेदारी कंपनी ‘जेट डिमोलिशंस’ के साथ मिलकर ध्वस्तीकरण का जिम्मा संभाल रही है, जो उसके लिए दुनिया में सिविल इंजीनियरिंग के सबसे बड़े कारनामों में से एक है।
लोगों की सेहत पर कितना असर पड़ेगा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो ट्विन टावर ध्वस्त होने के बाद इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा। फेलिक्स अस्पताल (Felix Hospital) के चेयरमैन डॉ. डीके गुप्ता से न्यूज 18 से बातचीत में ट्वीन टावर के गिराने से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को लेकर सचेत किया है...
- डॉ. डीके गुप्ता ने कहा कि ट्विन टावर गिरने से होने वाली ध्वनि और वायु प्रदूषण से लोगों को कई बीमारियां हो सकती हैं।
- डॉ. डीके गुप्ता ने अस्थमा से पीड़ित लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि बिल्डिंग गिरने से ऐसे मरीजों पर अधिक असर पड़ सकता है।
- इसके अलावा दिल की बीमारियों से ग्रसित लोगों की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और बढ़ सकती है। उनका ब्लड प्रेशर लेवल बढ़ सकता है।
- इमारत गिरने से शॉर्ट टर्म के साथ-साथ लॉन्ग टर्म बीमारियों से पीड़ित लोगों में लंग कैंसर होने की प्रबल आशंका है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने टावर के आसपास रहने वाले लोगों को सलाह दी है कि वो उस दिन से लेकर अगले कुछ दिनों तक दरवाजे और अपनी सभी खिड़की बंद रखें।
- ट्विन टावर के स्थानीय या आसपास के लोग खुले में व्यायाम या योग आदि करने से बचें।
- जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें और इस दौरान मास्क पहनकर ही निकलें।
कैसी है तैयारी?
एडिफिस इंजीनियरिंग के अधिकारी उत्कर्ष मेहता ने पीटीआई से कहा कि सभी विस्फोटकों में धमाका होने में 9 से 10 सेकंड का वक्त लगेगा और धमाके की जोरदार आवाज आएगी। धमाकों के बाद इमारतें एक बार में नहीं गिरेंगी और उन्हें पूरी तरह मलबे के ढेर में तब्दील होने में 4 से 5 सेकंड का वक्त लगेगा। उन्होंने कहा कि धूल का गुबार छंटने में लगभग 10 मिनट का वक्त लगेगा। अधिकारियों ने कहा कि महज 15 सेकेंड से भी कम समय में कुतुब मिनार से भी ऊंची इमारतें ढह जाएंगी।
एडिफिस इंजीनियरिंग पहले केरल के मराडु में अवैध रिहायशी इमारतों, तेलंगाना के सचिवालय और केंद्रीय कारागार तथा गुजरात में पुराना मोटेरा स्टेडियम ध्वस्त करने का जिम्मा उठा चुकी है। परियोजना के अधिकारियों ने बताया कि ध्वस्तीकरण में इस्तेमाल किए जाने वाले विस्फोटकों में डेटोनेटर्स, रासायनिक मिश्रण और शॉक ट्यूब शामिल हैं, जिनमें जेल या पाउडर रूप में विस्फोटक सामग्री होती है।
एक अधिकारी ने कहा कि ये विस्फोटक बहुत प्रभावशाली नहीं होते हैं, लेकिन जब इन्हें बड़ी तादाद में इस्तेमाल किया जाता है तो ये कंक्रीट को तोड़ सकते हैं। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नोएडा के सेक्टर 93-A में स्थित सुपरटेक के इन ट्विन टावरों को ध्वस्त किया जा रहा है। न्यायालय ने इन इमारतों को अवैध करार दिया तथा कहा कि नियमों का उल्लंघन करके इनका निर्माण किया गया है।
मलबे का लगेगा ढेर
परियोजना के अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए आकलन के अनुसार, एपेक्स (32 मंजिला) और सियान (29 मंजिला) इमारतों के ध्वस्त होने से तकरीबन 35,000 घन मीटर मलबा और धूल का गुबार पैदा होगा, जिसका निपटान किया जाना होगा। नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक (योजना) इश्तियाक अहमद ने कहा कि 21,000 घन मीटर मलबे को वहां से हटाया जाएगा और 5 से 6 हेक्टेयर की एक निर्जन जमीन पर फेंका जाएगा तथा बाकी मलबा ट्विन टावर के ग्राउंड एरिया में भरा जाएगा, जहां एक गड्ढा बनाया गया है।
मेहता ने बताया कि ट्रक मलबे को लेकर करीब 1,200 से 1,300 फेरे लगाएंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि, देरी होने से एक अच्छी बात हुई है। जेट डिमोलिशंस का दल पिछले एक सप्ताह से हवा के प्रवाह पर नजर रख रहा है और उन्होंने हवा का प्रवाह पश्चिम की ओर पाया है। अगर ऐसी ही प्रवृत्ति बनी रहती है तो ज्यादातर धूल ट्विन टावर के आगे के हिस्से की ओर चलेगी, जो कि सामने सड़क का हिस्सा है और खुला हुआ है।
हालांकि, पूरा मलबा बेकार नहीं जाएगा। इसमें से तकरीबन 4,000 टन लोहा और इस्पात निकलेगा, जिसका इस्तेमाल एडिफिस ध्वस्तीकरण की लागत वसूलने के तौर पर करेगी। नोएडा प्राधिकरण का भी सेक्टर 80 में निर्माण और ध्वस्त कचरा प्रबंधन संयंत्र है, जिसमें हर दिन 3000 टन कचरे का निस्तारण करने की क्षमता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस मलबे का वहां पर निस्तारण किया जाएगा या नहीं और अगर किया जाएगा तो कैसे तथा कितने वक्त में किया जाएगा।