SuperHero Treee: कोरोना महामारी के चलते अब लोग अपनी जीवनशैली को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं और प्राकृतिक चीजों की तरफ बढ़ रहे हैं। वह अब ऐसी चीजों को अपने खाने की प्लेट में शामिल कर रहे हैं जिससे उन्हें खूब फायदे हों। ऐसा ही एक पेड़ मोरिंगा का है। सब्जियों के रूप में या सांभर में इनग्रेडिएंट्स के तौर पर मोरिंगा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इसे शहजन, बेन तेल या सहिजन भी कहते हैं। यह कोई आम सब्जी का पेड़ नहीं है बल्कि इसे सुपरहीरो भी कहा जा सकता है। इसके जड़ से लेकर पत्तियों और बीज तक का इस्तेमाल होता है।
वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम ने कहा 'सुपरफूड'
स्वतंत्र वैश्विक संस्था वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम ने इसे लेकर वर्ष 2017 में एक ट्वीट किया था और कहा था कि अगर पेड़-पौधे सुपरहीरो होते तो मोरिंगा के पेड़ को भी इसमें शुमार किया जाता। इसके बीज का इस्तेमाल पानी की शुद्ध करने में किया जाता है। इसके पत्तियों का इस्तेमाल जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है। पौधे के हर हिस्से को खाया जा सकता है।
इसकी पत्तियों और फली में ऐसे रसायन पाए जाते हैं जिससे प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों और कीटों से सुरक्षित रह सकता है। यह सूखे में भी जीवित रह सकता है और विपरीत परिस्थितियों में तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह आने वाले समय में सुपरफूड बन जाए तो आश्चर्य नहीं होगा।
गंभीर बीमारियों में कारगर है यह पेड़
वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के मुताबिक वैज्ञानिक इसके गुणों का गंभीर बीमारियों के इलाज में कर रहे हैं। इसकी पत्तियों को कूटने के बाद सुखाकर एक पाउडर बनाया जाता है। यह पाउडर डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और बाउल डिसऑर्डर्स यानी पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज में कारगर है। शहजन के पेड़ की भारत और फिलीपींस में बहुतायत है लेकिन अब एशिया के अन्य देशों, अफ्रीका, अमेरिका और कैरिबायाई देशों में भी इसकी खेती हो रही है। दक्षिण-पूर्व एशिया में इसका सदियों से इस्तेमाल होता रहा है।