UP: बरेली के स्कूल में बच्चे दबाने लगे गला, मचा हड़कंप, फौरन आए डॉक्टर, SDM ने दी सफाई

Bareilly News: बरेली के नवाबगंज इलाके के एक सरकारी स्कूल में सात बच्चों ने अचानक गला दबाने और चीखने की घटना को अंजाम दिया, उन्होंने एक लड़की को देखने का दावा किया। डॉक्टरों ने इसे मास हिस्टीरिया बताया, जिसमें सामूहिक डर फैलता है। मामले की जांच की गई, लेकिन शारीरिक समस्या नहीं पाई गई

अपडेटेड Dec 03, 2024 पर 4:20 PM
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स्कूल में बच्चे अचानक करने लगे अजीब हरकतें।(image source: social media)

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के नवाबगंज इलाके के एक सरकारी स्कूल में अजीब घटना सामने आई है।  जिसने सभी को हैरान कर दिया। 30 नवंबर को दोपहर, क्लास 6 के सात बच्चे अचानक गला दबाने लगे और जोर-जोर से चीखने लगे। बच्चों ने दावा किया कि उन्हें एक लड़की दिखाई दी, जिसके नाखून बहुत लंबे थे और वह उनका गला दबा रही थी। यह घटना देख अन्य बच्चों में भी डर फैल गया, और कुछ बच्चों ने स्कूल छोड़कर भागने की कोशिश की। स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद, डॉक्टरों ने बच्चों की जांच की, लेकिन कोई शारीरिक समस्या नहीं मिली।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित गंगवार ने इसे मास हिस्टीरिया का मामला बताया। मास हिस्टीरिया एक मानसिक स्थिति होती है, जिसमें किसी व्यक्ति का डर या भावना अन्य लोगों पर प्रभाव डालती है।

क्या हुआ था स्कूल में?


घटना बरेली के नवाबगंज स्थित ईंध जागीर गांव के सरकारी स्कूल में हुई। दोपहर लगभग 2:30 बजे, एक छात्रा गश खाकर गिर पड़ी और अपना गला दबाने लगी। यह देख बाकी छह बच्चे – दीप्ति, लता, फरीन, सोहेल, इंद्रजीत और अंजुम – भी वही हरकतें करने लगे। बच्चों की चीख-पुकार से स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। बच्चों ने जो बताया उसे सुनकर हर किसी के पैर कांप गए, बच्चों ने बताया कि एक लंबे नाखून वाली महिला थी जो डरा रही थी।

जांच में क्या पता चला?

घटना के बाद, डॉक्टर विजय और उनकी टीम ने बच्चों की मेडिकल जांच की। खाने और अन्य संभावित कारणों की भी जांच की गई, लेकिन कुछ असामान्य नहीं मिला। जिले के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित गंगवार ने इसे सामूहिक डर या मास हिस्टीरिया का मामला बताया।

मास हिस्टीरिया क्या है?

मास हिस्टीरिया एक मानसिक स्थिति है, जिसमें किसी व्यक्ति का डर या भावना दूसरों पर भी प्रभाव डालती है। बरेली के न्यूरोसर्जन डॉ. सतीश कुमार के अनुसार, यह स्थिति अचानक और थोड़े समय के लिए होती है, खासकर महिलाओं और बच्चों में। डॉ. सतीश ने बताया कि अफवाहें और डर फैलने से इस स्थिति में वृद्धि हो सकती है।

 मास हिस्टीरिया को कैसे रोका जाए?

विशेषज्ञों का मानना है कि अफवाहों पर तुरंत नियंत्रण पाना और बच्चों को समझाना बहुत जरूरी है। अगर बच्चों को उनके डर से बाहर निकालने के लिए जल्द कदम उठाए जाएं, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। सही जानकारी और अफवाहों को रोकना इस समस्या का सबसे प्रभावी इलाज है। बरेली की घटना यह साबित करती है कि सामूहिक डर कैसे लोगों को प्रभावित कर सकता है, और इसे नियंत्रित करना समाज की जिम्मेदारी है।

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