शादी के कार्यक्रम चल रहे थे, तभी जीजा की हुई एंट्री और साला पहुंच गया अस्पताल, मेहमानों ने बचाई जान

बांदा जिले के अमवां गांव में वरीक्षा कार्यक्रम के दौरान नशे में धुत बहनोई ने साले विनोद पर हमला कर दिया। मारपीट और गला दबाने से विनोद बेहोश हो गया। मेहमानों ने किसी तरह बचाया और उसे अस्पताल पहुंचाया। इलाज में देरी और जबरन पैसे लेने के आरोप लगे। पुलिस में मामला दर्ज हुआ

अपडेटेड Feb 10, 2025 पर 3:12 PM
बहनोई-साले के बीच झगड़ा, मारपीट में युवक गंभीर रूप से घायल

फैमिली फंक्शन का उद्देश्य खुशियां बांटना होता है, लेकिन कभी-कभी ये झगड़े और विवाद का कारण भी बन जाते हैं। यूपी के बांदा जिले के बिसंडा थाना क्षेत्र के अमवां गांव में एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहां एक पारिवारिक समारोह के दौरान शराब के नशे में धुत बहनोई ने जमकर उत्पात मचाया। जब उसके साले विनोद ने उसे रोकने की कोशिश की, तो बहनोई ने आपा खो दिया और मारपीट पर उतर आया। नशे में धुत आरोपी ने विनोद को बेरहमी से पीटा और गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की।

परिजनों और मेहमानों के बीच-बचाव से किसी तरह विनोद की जान बचाई गई। गंभीर रूप से घायल विनोद को पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और फिर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।

वरीक्षा कार्यक्रम में हुआ विवाद

गांव के निवासी विनोद के बड़े भाई संतोष की शनिवार को वरीक्षा थी, जिसमें कई मेहमान शामिल थे। इसी दौरान शराबी बहनोई वहां पहुंचा और उत्पात मचाने लगा। विनोद ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन उसने विनोद को उठाकर पटक दिया और बुरी तरह पीटने लगा। गला दबाने के कारण विनोद बेहोश हो गया।


मेहमानों की मदद से बची जान, हालत गंभीर

परिजनों और मेहमानों ने किसी तरह बीच-बचाव किया और विनोद को PHC बिसंडा में भर्ती कराया गया। हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उसका इलाज जारी है।

दंपति ने मां-बेटे पर किया हमला

कमासिन थाना क्षेत्र के दलपापुरवा गांव में एक अन्य घटना में, नथिया नामक महिला ने आरोप लगाया कि गांव के अखिलेश और उनकी पत्नी सुधा ने खेत में जबरदस्ती गिट्टी डाल दी। विरोध करने पर उन्होंने गाली-गलौज की और मारपीट की। महिला का बेटा बचाव के लिए आया, तो उसे भी पीटा गया। पीड़िता ने आरोपित दंपति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।

पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराने का दबाव

विनोद के पिता शिवकुमार का आरोप है कि जब वे अपने घायल बेटे को PHC ले गए, तो वहां मौजूद डॉक्टर और कर्मचारी इलाज करने से मना कर रहे थे। वे पहले पुलिस में शिकायत करने की बात कह रहे थे। काफी अनुरोध के बाद 500 रुपये देने पर ही प्राथमिक उपचार किया गया।

10 घंटे में 3700 रुपये की दवाएं मंगवाईं

शिवकुमार के अनुसार, शनिवार रात 11:23 बजे अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टरों ने बाहर से 1600 रुपये की दवाएं मंगवाईं। कुछ घंटों बाद 1300 रुपये की और दवाएं लिख दीं। रविवार सुबह फिर 800 रुपये की दवाएं मंगवाई गईं, जिसके बाद विनोद को डिस्चार्ज कर दिया गया।

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