अमेरिका से डिपोर्ट किए गए 104 भारतीयों के भारत लैंड होने के बाद उनसे शुरुआती पूछताछ करने के बाद उन्हें उनके घरवालों को सौंप दिया गया। डिपोर्ट किए गए इन भारतीय नागरिकों में पीलीभीत के गुरप्रीत भी शामिल हैं। अमृतसर में डिपोर्ट किए जाने के बाद स्थानीय पुलिस गुरप्रीत को पूरनपुर लेकर आई, जहां उनसे कई घंटों तक पूछताछ की गई और बाद में परिवार वालों को सौंप दिया गया। अब इस मामले में आगे पुलिस की क्या कार्रवाई होगी, इस पर कुछ भी साफ नहीं है।
दरअसल पीलीभीत के पूरनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बंजरिया गांव के रहने वाला गुरप्रीत सितंबर 2022 में लोकल एजेंट की मदद से इंग्लैंड गया था, जहां वह पार्ट टाइम जॉब कर रहा था। कुछ दिनों तक काम करने के बाद भी उसे अपने मन मुताबिक काम नहीं मिला। ऐसे में वह एक और एजेंट के संपर्क में आया।
इस एजेंट ने मोटी रकम वसूल कर उसे डंकी रूट से अमेरिका भेज दिया। 13 जनवरी को अमेरिकी एजेंसियों ने उसे बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से ही वह अपने परिजनों के संपर्क में नहीं था।
हाल ही में उसके घरवालों को उसके डिपोर्ट होने की खबर मिली थी। गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे पूरनपुर पुलिस गुरप्रीत को लेकर थाने पहुंची, जहां लगभग दो घंटे तक उससे पूछताछ की गई।
इस दौरान जब मीडिया ने गुरप्रीत से बात करने की कोशिश की, तो वह खुद को पीड़ित बताते हुए रोने लगा। बाद में पूरनपुर पुलिस ने गुरप्रीत को उसके घरवालों को सौंप दिया।
डंकी रूट पर माफिया ने छीने फोन और पैसे
अमृतसर में लैंड करने के बाद वहां भी गुरप्रीत से पुलिस ने पूछताछ की थी। इसके बाद उसे पूरनपुर पुलिस को सौंप दिया गया था। जब पुलिस पूरनपुर थाने में गुरप्रीत को लेकर पहुंची, तब वह अपने परिवार से करीब ढाई साल बाद मिला था।
थाने में अपने परिजनों से बातचीत के दौरान उसने बताया कि डंकी रूट में लोकल माफियाओं ने उसका मोबाइल फोन और पैसे छीन लिए थे, जिनकी कीमत भारतीय रुपयों में लाखों में थी।
अपने परिवार से बातचीत के दौरान गुरप्रीत भावुक नजर आया। वहीं पुलिस पूछताछ के दौरान भी वह खुद को एजेंट की ठगी का शिकार बताता रहा। हालांकि गुरप्रीत व उसके परिवार ने कैमरे पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया।