Satish Kumar: कौन हैं सतीश कुमार? रेलवे बोर्ड के पहले दलित CEO के बारे में जानें सबकुछ

Who is Satish Kumar: सतीश कुमार को रेलवे बोर्ड का चेयरमैन और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति 1 सितंबर से प्रभावी होगी। बोर्ड के इतिहास में वह अनुसूचित जाति से इस पद पर आसीन होने वाले पहले व्यक्ति हैं। वे जया वर्मा सिन्हा की जगह लेंगे

अपडेटेड Aug 28, 2024 पर 4:39 PM
Who is Satish Kumar: IRMS के अधिकारी सतीश कुमार की नियुक्ति 1 सितंबर 2024 से प्रभावी होगी

Who is Satish Kumar: इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (IRMS) के अधिकारी सतीश कुमार (Satish Kumar) को रेलवे बोर्ड का चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि बोर्ड के इतिहास में वह अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) से आने वाले पहले चेयरमैन और CEO हैं। बोर्ड की वर्तमान चेयरमैन और सीईओ जया वर्मा सिन्हा (Jaya Varma Sinha) 31 अगस्त को रिटायर हो रही हैं। सतीश कुमार की नियुक्ति 1 सितंबर 2024 से प्रभावी होगी।

सतीश कुमार कौन हैं?

इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग (IRSME) के 1986 बैच के अधिकारी सतीश कुमार ने अपने 34 साल के शानदार करियर में भारतीय रेलवे में बहुत बड़ा योगदान दिया है। पीटीआई ने बोर्ड के एक अधिकारी के हवाले से बताया, "8 नवंबर 2022 को उन्होंने उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज के जनरल मैनेजर के रूप में कार्यभार संभाला, जो सार्वजनिक सेवा की उनकी यात्रा में एक और मील का पत्थर साबित हुआ।"


रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने प्रतिष्ठित मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री प्राप्त की है। इसके अलावा उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (Indira Gandhi National Open University-IGNOU) से ऑपरेशन मैनेजमेंट और साइबर लॉ में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा हालिस किया। उन्होंने कहा कि कुमार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि उनकी व्यावसायिक उपलब्धियों जितनी ही प्रभावशाली है।

1988 से कर रहे हैं रेलवे की सेवा

कुमार ने मार्च 1988 में भारतीय रेलवे के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। तब से वह कई जोन और डिवीजनों में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने रेलवे सिस्टम के भीतर इनोवेशन को आगे बढ़ाने, दक्षता बढ़ाने और महत्वपूर्ण सुरक्षा सुधारों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

रेलवे के एक अधिकारी ने कहा, "उनकी शुरुआती पोस्टिंग तत्कालीन मध्य रेलवे के झांसी डिवीजन और वाराणसी में डीजल लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) में हुई। वहां उन्होंने लोकोमोटिव इंजीनियरिंग और रखरखाव में अपने कौशल को निखारा।"

फॉग सेफ डिवाइस में प्रमुख योगदान

रेलवे के अधिकारी ने बताया, "बाद में उन्होंने पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर और पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स में काम किया। डिवीजनों की परिचालन दक्षता बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में योगदान दिया।" उन्होंने कहा कि कुमार का महत्वपूर्ण योगदान फॉग सेफ डिवाइस पर उनका काम है। यह एक ऐसा इनोवेशन है जो कोहरे की स्थिति के दौरान सुरक्षित ट्रेन संचालन सुनिश्चित करने में सहायक साबित हुआ है।

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उन्होंने कहा, "यह भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बन गया है। इससे सर्दियों के महीनों में भारत के उत्तरी क्षेत्रों में कोहरे से जुड़े जोखिमों को काफी हद तक कम करता है।" रेलवे अधिकारियों का कहना है कि रेलवे टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने में कुमार के काम को व्यापक मान्यता और प्रशंसा मिली है। अप्रैल 2017 से अप्रैल 2019 के बीच, उन्होंने उत्तर रेलवे के लखनऊ डिवीजन के लिए मंडल रेल मैनेजर (DRM) के रूप में कार्य किया।

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