केंद्र सरकार (Central Government) ने सुप्रीम कोर्ट (SC) से कहा कि रूस यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine War) के चलते भारत लौटे मेडिकल छात्रों (Indian Students) को भारतीय यूनिवर्सिटी या कॉलेजों दाखिला देना संभव नहीं है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद कई भारतीय छात्रों को अपनी मेडिकल की पढ़ाई बीच में छोड़ कर स्वदेश लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा था। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नेशनल मेडिकल कमिशन अधिनियम में कानूनन इसकी अनुमति नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने दायर एक हलफनामे में, केंद्र ने कहा कि इस तरह की छूट (उन्हें भारतीय यूनिवर्सिटी में दाखिल करने) की अनुमति देने से भारत में मेडिकल एजुकेशन के मानकों में बाधा आएगी। कोर्ट में ये हलफनामा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव की तरफ से दायर किया गया था।
शीर्ष अदालत में मंत्रालय कई सारी याचिकाओं का जवाब दे रहा था। याचिकाओं में उन भारतीय छात्रों के लिए राहत की मांग की गई थी, जिन्हें 24 फरवरी 2022 को रूस की तरफ से यूक्रेन के खिलाफ "विशेष सैन्य अभियान" घोषित किए जाने के बाद, अपनी मेडिकल की पढ़ाई को बीच में ही छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
हलफनामे में, केंद्र सरकार ने कहा कि छात्रों ने दो कारणों से विदेशों में पढ़ाई करने का ऑप्शन चुना, ये दो कारण हैं- NEET में पास न होने और सामर्थ्य।
सरकार ने कहा कि अगर वे प्रमुख भारतीय मेडिकल कॉलेजों में खराब योग्यता वाले छात्रों को अनुमति देते हैं, तो उन उम्मीदवारों की तरफ से भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिन्हें इन कॉलेजों में दूसरे कारणों के चलते सीटें नहीं मिलीं।
सरकार ने कहा कि यूक्रेन से लौटे छात्र भारतीय कॉलेजों में फीस का खर्च वहन नहीं कर पाएंगे।
हलफनामे में कहा गया है, "बड़ी ही विनम्रतापूर्वक ये कहा जाता है कि अगर खराब मेरिट वाले इन छात्रों को डिफ़ॉल्ट रूप से भारत के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की अनुमति दी जाती है, तो उन इच्छुक उम्मीदवारों से कई मुकदमे हो सकते हैं, जो इन कॉलेजों में सीट नहीं पा सके और छोटे-मोटे कॉलेजों में एडमिशन ले लिया हो या मेडिकल कॉलेजों में सीट ही नहीं निकाल पाए हों।"
सरकार ने हलफनामे में कहा, “आगे, सामर्थ्य के मामले में, अगर इन उम्मीदवारों को भारत में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज अलॉट किए जाते हैं, तो वे एक बार फिर इन कॉलेजों के फीस नहीं वहन कर सकते हैं।”