विदेशों में बैठे खालिस्तान आतंकवादी (Khalistani Terrorist) अब अपनी हदें पार कर रहे हैं। प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के अमेरिका में बैठे नामित आतंकवादी जीएस पन्नू (GS Pannu) ने एक वीडियो जारी कर, भारत के गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah), विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) और कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा (Sanjay Kumar Verma) की विदेश यात्रा के बारे में जानकारी देने वाले को 1,25000 अमेरिकी डॉलर का इनाम देने की घोषणा की है। पन्नू ने इन लोगों पर जून में वैंकूवर में एक और खालिस्तान आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर (Hardeep Singh Nijjar) की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
Hindustan Times के मुताबिक, NIA ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत पन्नू को वॉटेंड घोषित किया है। उसके पास अमेरिका और कनाडा के डबल पासपोर्ट हैं। उसने निज्जर के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत शाह, जयशंकर और वर्मा को जवाबदेह ठहराने की धमकी दी। निज्जर सिख कट्टरपंथियों के बीच एक गैंग वॉर में मारा गया था।
इसके बाद SFJ ने कनाडा में सिख कट्टरपंथियों से 15 अगस्त को ओटावा, टोरंटो और वैंकूवर में भारतीय राजनयिक परिसरों की घेराबंदी करने का आह्वान किया है और 10 सितंबर को वैंकूवर में तथाकथित सिख जनमत संग्रह की भी घोषणा की है।
हालांकि, कनाडा में भारतीय राजनयिकों ने पहले ही खुफिया एजेंसियों और स्थानीय कानूनी विभागों को शाह, जयशंकर और वर्मा के ऊपर रखे इस इनाम की जानकारी दे दी है। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि भारत के करीबी सहयोगियों में से एक पन्नू को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है, जबकि दोनों देशों के बीच एक मजबूत संबंध है।
भले ही चरमपंथी पन्नू ने इन शीर्ष नेताओं और एक राजनयिक के विदेश दौरे की जानकारी के लिए वीडियो मैसेज के जरिए इनाम की घोषणा की है, लेकिन सच तो ये है कि आने वाले दिनों में शाह, जयशंकर और वर्मा को निशाना बनाने के लिए आतंकी नेता की ये खुली धमकी है।
जहां भारत के शीर्ष राजनयिक जयशंकर ज्यादातर विदेश यात्रा पर रहते हैं, तो वहीं गृह मंत्री अमित शाह को तब तक भारत से बाहर यात्रा करने में कोई दिलचस्पी नहीं है, जब तक कि भारतीय NRI को भारतीय आम चुनाव में मतदान करने की अनुमति नहीं मिल जाती।
विदेश मंत्री जयशंकर ने जस्टिन ट्रूडो सरकार पर कनाडा में सिख चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई न करके वोट बैंक को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है, लेकिन पन्नू पर अमेरिकी सरकार की निष्क्रियता भी बहुत कुछ कह रही है।
असल में, भारतीय इंटेलिजेंस ने अपने अमेरिकी समकक्षों को यह बता दिया है कि ये उनको ऐसा लगता है कि अमेरिकी सरकार पन्नू के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना चाहती है, क्योंकि वह अमेरिकी CIA या FBI का एजेंट हो सकता है।
दशकों से, कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका और जर्मनी ने पंजाब में मानवाधिकार उल्लंघन के नाम पर सिख कट्टरपंथियों को आश्रय दिया है और उन्हें भारत को निशाना बनाने के लिए अपने देशों के भीतर फिंडिंग की भी अनुमति दी है।