विष्णु अवतार से लेकर स्वास्तिक, रामलला की मूर्ति पर बने हैं सनातन धर्म के ये खास चिह्न

रामलला की मूर्ति सोशल मीडिया पर जबसे सामने आई है हर जगह भक्तिमय हो गई है। अरुण योगीराज द्वारा बनाई गई 51 इंच की मूर्ति में खास तरह की डिटेल्स पर ध्यान दिया गया है। मूर्ति के आस-पास सनातन धर्म और भगवान विष्णु से जुड़े चमत्कारिक चिह्नों का प्रयोग किया गया है।

अपडेटेड Jan 20, 2024 पर 10:14 AM
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रामलला की मूर्ति के साथ दिखाई दिए ये खास चिह्न

रामलला की 51 इंच की मूर्ति को गर्भग्रह के अंदर रख  दिया गया है। मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले मू्र्ति के आंखों पर लगी पट्टी को नहीं हटाया जाएगा। मूर्ति की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में रामलला के साथ-साथ मूर्ति के आस-पास बने खास सनातन धर्म के चिह्न बेहद खास हैं। चरणों में हनुमान और गरुड़ के अलावा विष्णु के दशावतार भी इस मूर्ति पर हैं। स्वास्तिक, ओम, चक्र, शंख और सूर्य नारायण इन सभी को एकसाथ जोड़कर मूर्ति को काफी भव्य बनाया गया है। अगर मूर्ति की बारीकियों को देखें तो ये अब तक की सबसे ज्यादा डिटेल में बनी भगवान राम की मूर्ति की है।

रामलला की मूर्ति पर भगवान विष्णु के दशावतार

रामलला की मूर्ति की तस्वीरें हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आ गई हैं। इस तस्वीर में मूर्ति की हर बारीकी काफी करीब से दिखाई दे रही है। भगवान विष्णु के दशावतार कृष्ण, परशुराम, कल्कि और नरसिम्हा भी मूर्ति के ईर्द-गिर्द दिखाई दे रहे हैं। भगवान राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान को श्रीराम के दाएं पांव के पास जगह दी गई है। भगवान विष्णु के अवतार के रूप में मशहूर गरुड़ रामलला की मूर्ति के बाएं पांव पर स्थान दिया गया है।

रामलला मूर्ति के हाथों की खास डिटेल्स

मूर्ति के सबसे ऊपरी भाग पर देखें तो सनातन धर्म के सबसे पवित्र चिह्न दिखाई देंगे। रामलला के सिर के पास ओम, शंख, चक्र, गदा और शंख दिखाई दे रहे हैं। मू्र्ति के चेहरे के पास सूर्य नारायण आभामंडल दिखाई दे रहा है। मूर्ति का दायां हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में है और बाएं हाथ में धनुष है।

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रामलला की मू्र्ति को बनाने वाले मूर्तिकार

रामलला की मूर्ति को मैसूर के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाया है। ये मूर्ति भगवान राम के पांच साल के रूप को दर्शाती है। 51 इंच की मूर्ति काले पत्थर से बनाई गई है। काला पत्थर कई सौ सालों तक खराब नहीं होता है। मंदिर में इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे पानी, रोली और चंदन से भी ये पत्थर खराब नहीं होता है। मूर्ति चमकदार कपड़े और सिर पर मुकुट पहने दिखाई दे रही है। अरुण योगीराज ने इससे पहले भी कई मूर्तियां तैयार की हैं। इंडिया गेट के पास अमर जवान ज्योति के पास लगी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति भी अरुण की ही कला की देन है। इसके अलावा आदि शंकराचार्य की फेमस मूर्ति को भी पत्थर पर अरुण योगीराज ने ही जीवंत किया।

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