जब 1918 में नर्मदा में बहते मिले इन्फ्लूएंजा के मरीजों के शव, Covid-19 की तरह ही उन दिनों फैली थी महामारी

साल 1918 में भारत में इन्फ्लूएंजा महामारी, जिसे आमतौर पर स्पैनिश फ्लू (Spanish Flu) के नाम से भी जाना जाता है, ने भीषण प्रकोप फैलाया था

अपडेटेड May 12, 2021 पर 2:23 PM
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कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी के भीषण काल में बिहार और उत्तर प्रदेश में गंगा नदी में कई शवों के मिलने की खबर सामने आई है। ऐसा माना जा रहा है कि ये शव Covid-19 के मरीजों के हैं, जिनके रिश्तेदारों को उनके अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं मिली और उन्हें नदी में फेंक दिया गया। कुछ ऐसी ही घटनाएं देश में अब से पहले भी हो चुकी हैं और उनके पीछे भी एक भयंकर महामारी ही कारण थी।

दरअसल इन्फ्लूएंजा महामारी (Influenza Epidemic) के दौरान कुछ ऐसा ही हुआ था, जिसे आमतौर पर स्पैनिश फ्लू (Spanish Flu) के नाम से भी जाना जाता है। एक सदी से भी पहले नर्मदा नदी में लाशें तैरती देखी गईं थीं, जो अब मध्य प्रदेश का हिस्सा है। इंडियन एक्सप्रेस ने नेशनल आर्काइव्ज की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि उन दिनों आखिर हुआ क्या था।

नेशनल आर्काइव्ज में "1918 में भारत में इन्फ्लुएंजा महामारी" शीर्षक से एक रिपोर्ट शामिल है। इस रिपोर्ट में जून 1919 की भारत सरकार के विदेशी और राजनीतिक विभाग की एक और रिपोर्ट शामिल है। इस रिपोर्ट में 12 नवंबर 1918 को जनरल ऑफिसर कमांडिंग 5वीं डिवीजन (महू) की तरफ से भेजा गया एक विस्तृत नोट है।

इस पत्र का अंश है, "मुझे इन्फ्लूएंजा के मरीजों की लाशों के कारण नर्बदा (अब नर्मदा) नदी के प्रदूषण पर दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक एजेंट की एक रिपोर्ट के बारे में आपकी जानकारी मिली है।" ये नोट सेना के दक्षिणी कमान के प्रभारी मेजर जनरल को लिखा गया था।

रिपोर्ट की शुरुआत इससे होती है कि खलघाट (मध्य प्रदेश में एक शहर) में नर्मदा नदी में भयंकर प्रदूषण की स्थिति के बारे में चौंकाने वाली खबरें आई हैं।

इसमें कहा गया, "खलघाट धरमपुरी के बीच धारा में बड़ी संख्या में क्षत-विक्षत लाशें मिली हैं। एक ही परिवार में कई लोगों की मौत हो रही है, जो लोग श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए जाते हैं, वे इन्फ्लूएंजा की इस महामारी से इतनी बुरी तरह पीड़ित थे कि दाह संस्कार असंभव हो गया था।"


नर्मदा में क्यों बहाने पड़े शव?

राजनीतिक एजेंट इस रिपोर्ट में कहते हैं कि महामारी के कारण पैदा हुई स्थिति सामान्य व्यवस्थाओं से परे थी और हालात इतने बिगड़ गए कि लकड़ी या गोबर के उपले उपलब्ध नहीं थे, इसलिए शवों को नर्मदा में फेंक दिया गया था।

इतना ही नहीं नर्मदा में नाव चलाने वाले नाविकों ने कहा कि लाशें हमेशा उनकी नावों से उलझ रही थीं और बदबू इतनी थी कि वे नदी को पार नहीं कर सकते थे।

कैसे निकाले गए शव?

रिपोर्ट में बताया गया कि लाशों को धारा के जरिए बहाने की सरल लेकिन बेहद की गंदे तरीके से हटाया गया था। जो शव नदी में काफी दूर थे, उन्हें आगे बहा दिया गया और कुछ को नाव के जरिए निकाल कर गाड़ियों में लाद कर ले जाया गया। एजेंट ने कहा कि करीब आठ क्षत-विक्षत शव नदी में ही बहते दिखे जिन पर कौवे बैठे थे।

उस इलाके में महामारी का कितना प्रकोप था?

एजेंट्स ने रिपोर्ट में बताया कि खुद डिस्पेंसरी के कई डॉक्टर बीमार हैं और दवाओं के स्टॉक खत्म हो गए हैं। दीवान ने मुझे बताया कि 4,000 से ज्यादा लोग धार शहर में बीमार हैं और करीब 900 मरीज अस्पताल में रोजाना जाते हैं।

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