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सेना आखिर क्यों अपने जवानों और अफसरों को चीन की भाषा मंदारिन सिखाने पर दे रही है जोर?

सेना को हाल में Territorial Army में भी मंदारिन की जानकारी बढ़ाने के लिए इंटरप्रेटर्स की नियुक्ति का एप्रूवल मिल गया है। इस बारे में रविवार को नोटिफिकेशन जारी किया गया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 11, 2022 पर 2:04 PM
सेना आखिर क्यों अपने जवानों और अफसरों को चीन की भाषा मंदारिन सिखाने पर दे रही है जोर?
आर्मी के नॉर्दन, ईस्टर्न और सेंट्रल कमांड के लैंग्वेज स्कूलों में मंदारिन के कई कोर्सेज शुरू किए गए हैं।

सेना ने अपने जवानों और अफसरों को चीन की भाषा मंदारिन सिखाने पर फोकस बढ़ा दिया है। इसकी वजह Line of Actual Control (LAC) पर लंबे समय से बना गतिरोध है। इंडिया और चीन की सीमा 3,400 किलोमीटर लंबी है। दोनों देशों के रिश्तों में आई तल्खी के बाद इंडिया LAC पर करीबी नज रख रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जूनियर और सीनियर मिलिट्री कमांडर्स के मंदारिन के ज्ञान को बढ़ाने के लिए कई कदम कमद उठाए गए हैं। इसकी एक वजह यह है कि मंदारिन की अच्छी जानकारी होने पर जरूरत पड़ने पर इन अफसरों को चीन के अफसरों के साथ बातचीत करने में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी।

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आर्मी के नॉर्दन, ईस्टर्न और सेंट्रल कमांड के लैंग्वेज स्कूलों में मंदारिन के कई कोर्सेज शुरू किए गए हैं। आर्मी मंदारिन भाषा के कई स्क्रिप्ट्स और लिटरेचर के ट्रांसलेशन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल कर रही है। एक सूत्र ने बताया कि मंदारिन का अच्छा ज्ञान होने से सेना के जवान बेहतर तरीके से अपनी बात चीन के अफसरों को समझा सकेंगे।

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