Taj Mahal: दिल्ली के बाद अब आगरा में यमुना का रौद्र रूप, 45 साल में पहली बार पानी में डूबीं ताजमहल की दीवारें

Taj Mahal: अधिकारियों ने बताया कि गोकुल और ओखला बैराज से छोड़े गए पानी के कारण यमुना नदी में बाढ़ के हालात बन गए हैं। सोमवार को ओखला बैराज से आगरा की ओर 1,06,473 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसके अलावा मथुरा में गोकुल बैराज से 1,24,302 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। दोनों बैराज से हर घंटे पानी छोड़ा जा रहा है, ताकी दिल्लीवासियों को राहत मिल सके। पानी के तेज बहाव से यमुना किनारे बसे लोगों की झोपडियां और सामान पानी में बह गया है

अपडेटेड Jul 18, 2023 पर 5:57 PM
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Taj Mahal: अधिकारी के अनुसार, पिछले 24 घंटों में बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण यमुना के स्तर में वृद्धि हुई है

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बाद अब उत्तर प्रदेश के आगरा में भी यमुना (Yamuna Flood) का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। शहर में यमुना नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि अब करीब दो फीट तक ताजमहल (Taj Mahal Flood) की दीवारें यमुना के पानी में डूब गई हैं। तेजी से बढ़ते जलस्‍तर की वजह से यमुना नदी का पानी 45 साल में पहली बार ताजमहल परिसर तक पहुंचा है। ताजमहल के पीछे बने गार्डन में यमुना का पानी भर गया है। आगरा के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। जलमग्न इलाकों में रह रहे लोगों से घर खाली करने को कहा गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यमुना के पानी में ताजमहल के पीछे स्थित एक बगीचा डूबा हुआ दिख रहा है। आखिरी बार यमुना का पानी 1978 की बाढ़ के दौरान ताजमहल के करीब पहुंची थी। उस वक्त जल स्तर 497.9 फीट तक पहुंच गया था। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, सोमवार को आगरा में यमुना का जलस्तर 495.8 फीट पर पहुंच गया। आगरा में यमुना खतरे के निशान से ढाई फीट ऊपर बह रही है। जलस्तर के एक से दो फीट तक और बढ़ने की आशंका है। इस चेतावनी को लेकर लेकर प्रशासन अलर्ट पर है।

अधिकारियों ने बताया कि गोकुल और ओखला बैराज से छोड़े गए पानी के कारण यमुना नदी में बाढ़ के हालात बन गए हैं। सोमवार को ओखला बैराज से आगरा की ओर 1,06,473 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसके अलावा मथुरा में गोकुल बैराज से 1,24,302 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। दोनों बैराज से हर घंटे पानी छोड़ा जा रहा है, ताकी दिल्लीवासियों को राहत मिल सके। पानी के तेज बहाव से यमुना किनारे बसे लोगों की झोपडियां और सामान पानी में बह गया है। इतना ही नहीं शहर के तनौरा नूरपूर, दयालबाग, बल्केश्वर, फाउंड्रीनगर, कृष्णा कालोनी, मोतीमहल और लालकिला के पास यमुना का पानी पहुंच गया है।


प्रशासन अलर्ट

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण सहायक प्रिंस वाजपेयी ने कहा कि मुख्य मकबरे को बाढ़ का सामना करने के लिए बनाया गया था। इकोनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए उन्होंने कहा, "स्मारक की योजना सावधानीपूर्वक बनाई गई थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारी बाढ़ के दौरान भी पानी मुख्य संरचना में प्रवेश न कर सके।" एहतियात के तौर पर अधिकारियों ने बाढ़ से बचने के लिए सिकंदरा में कैलाश मंदिर से लेकर ताजमहल के पास दशहरा घाट तक नदी घाटों पर बैरिकेड्स लगा दिए हैं। अधिकारी के अनुसार, पिछले 24 घंटों में बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण यमुना के स्तर में वृद्धि हुई है।

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आगरा में बाढ़ जैसी स्थिति के बीच अधिकारियों ने राहत तैयारियां तेज कर दी हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, नदी में गिरने वाले नालों के बैकफ्लो के कारण ताजमहल की ओर जाने वाली यमुना किनारा रोड पर भी जलभराव हो गया। एक अधिकारी ने कहा, "रविवार शाम 4 बजे तक यमुना में जल स्तर 495.8 फीट था। आगरा में इस नदी का निम्न बाढ़ स्तर 495 फीट है।" उन्होंने कहा, "अगर बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है तो हम उससे निपटने के लिए तैयार हैं। चौकियां बनाई गई हैं। नाविक और गोताखोर अलर्ट पर हैं। निचले इलाकों में स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।"

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