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Atomberg IPO में निवेश पर ₹190 करोड़ की देनदारी विरासत में; छोटा-मोटा नहीं, इतना बड़ा है मामला

Atomberg IPO: पंखे, ग्राइंडर और वॉटर प्योरिफायर बेचने वाली एटमबर्ग आईपीओ ला रही है जिसका ड्राफ्ट फाइल हो चुका है। हालांकि निवेश से जुड़ा फैसला लेने से पहले कुछ बातें जान लेनी जरूरी है जैसे कि इसके शेयरों की खरीदारी पर ₹190 करोड़ की देनदारी का बोझ भी अपने ऊपर लेना पड़ सकता है। यह कंपनी के कुल मौजूदा बैलेंस का करीब 88% है। जानिए क्या है पूरा मामला

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Aug 24, 2026 पर 2:11 PM
Atomberg IPO में निवेश पर ₹190 करोड़ की देनदारी विरासत में; छोटा-मोटा नहीं, इतना बड़ा है मामला
Atomberg ने कारोबार की शुरुआत कम बिजली खर्च करने वाले BLDC (ब्रशलेस डीसी) सीलिंग फैन बेचने से की थी और अब यह अपने एटमबर्ग ब्रांड के तहत सीलिंग फैन, पेडेस्टल फैन, वॉल फैन, एग्जॉस्ट फैन, मिक्सर ग्राइंडर, वॉटर प्यूरीफायर, कोल्ड-प्रेस्ड जूसर और स्मार्ट लॉक बेच रही है।

Atomberg IPO: कंज्यूमर एप्लाएंसेज कंपनी एटमबर्ग आईपीओ ला रही है। हालांकि इसके ड्राफ्ट के मुताबिक निवेशकों को थोड़ा सतर्क रहना चाहिए क्योंकि उन्हें करीब ₹190 करोड़ की देनदारी विरासत में मिलेगी। निवेशकों को ये पैसे कंपनी के फाउंडर्स मनोज कुमार मीना और सिबाब्रता दास को उन बोनस के लिए देने हैं जो पिछले वित्त वर्षों में इन्हें दिए गए लेकिन पेमेंट नहीं हुआ और डेफर्ड यानी स्थगित कर दिया गया। यह देनदारी कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि कंपनी के पास ₹215.87 करोड़ का कैश और बैंक डिपॉजिट्स है यानी कि डेफर्ड बोनस इसका करीब 88% है यानी कि जब डेफर्ड बोनस का पेमेंट होगा तो कंपनी के पास कैश कम हो सकता है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो निगेटिव यानी (-) ₹218.98 करोड़ में रहा और इसे ₹148.88 करोड़ का घाटा भी हुआ।

क्या है पूरा मामला

मनीकंट्रोल ने एनालिसिस में पाया कि कंपनी के आईपीओ ड्राफ्ट और वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 में मनोज और सिबाब्रता को कुल मिलाकर ₹59.97 करोड़ और वित्त वर्ष 2024 में ₹132.89 करोड़ करोड़ का बोनस दिया गया लेकिन मार्च 2026 तक इन ₹192.46 करोड़ के बोनस में से ₹190.09 करोड़ का बोनस अभी भी देना है। हालांकि आईपीओ ड्राफ्ट में यह खुलासा नहीं हुआ है कि इतने बड़े बोनस को तय करने के लिए मानक क्या था और इसे डेफर्ड बोनस के रूप में क्यों बनाया गया।

निवेशकों के लिए इससे भी अहम बात ये है कि आईपीओ के ड्राफ्ट में पेमेंट की डेट, किश्तों की शेड्यूल या सेटलमेंट ट्रिगर के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है। ड्राफ्ट में सिर्फ इतना है कि मैनेजमेंट बोनस को आने वाले समय में चुकाया जाएगा। ड्राफ्ट में यह भी नहीं है कि इसका पेमेंट आईपीओ के पैसों से किया जाएगा या नहीं। बता दें कि दोनों फाउंडर्स की कंपनी में कुल मिलाकर 27.75% हिस्सेदारी है। वैसे दोनों अपनी कुछ हिस्सेदारी पहले ही बेच चुके हैं और वर्ष 2019 से सेकंडरी सेल के जरिए मनोज मीणा को लगभग ₹40.18 करोड़ और सिबाब्रता दास को लगभग ₹31.39 करोड़ मिले थे।

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