डेनमार्क की शराब कंपनी कार्ल्सबर्ग A/S ने अपनी भारतीय यूनिट के IPO के लिए कॉन्फिडेंशियल रूट से ड्राफ्ट पेपर जमा कर दिए हैं। प्लान 70 करोड़ डॉलर (6,600 करोड़ रुपये) तक जुटाने का है। मनीकंट्रोल को मामले की जानकारी रखने वालों से पता चला है कि इस लिस्टिंग में कंपनी की ओर से केवल ऑफर फॉर सेल रह सकता है। लिस्टिंग इस साल के आखिर में हो सकती है। कॉन्फिडेंशियल रूट कंपनियों को लिस्टिंग पर अंतिम फैसले पर पहुंचने तक गोपनीयता की सुविधा देता है। अगर जरूरी हो तो वे बाद में बाजार की स्थितियों के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती हैं।
कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग कंपनियों को सेंसिटिव बिजनेस डिटेल्स या फाइनेंशियल मेट्रिक्स और रिस्क्स को गोपनीय रखने की इजाजत देती है, खासकर कॉम्पिटीटर्स से। दूसरी ओर स्टैंडर्ड DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) फाइलिंग के बाद एक पब्लिक डॉक्युमेंट बन जाता है।
कार्ल्सबर्ग इस प्रस्तावित शेयर बिक्री के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी और सिटीग्रुप इंक की भारतीय यूनिट्स के साथ काम कर रही है। कार्ल्सबर्ग के ब्रांड्स में कार्ल्सबर्ग, टुबोर्ग, क्रोननबर्ग 1664, ग्रिमबर्गेन, सोमरस्बी, होल्स्टन शामिल हैं। कंपनी के IPO के साइज, स्ट्रक्चर और टाइमिंग जैसी डिटेल्स में बदलाव हो सकता है।
Carlsberg A/S का करीब 22 प्रतिशत मार्केट शेयर पर कब्जा
कार्ल्सबर्ग इंडिया भारत की दूसरी सबसे बड़ी शराब निर्माता कंपनी है। इसका मार्केट शेयर लगभग 22 प्रतिशत है। इसकी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, कार्ल्सबर्ग की इंडिया यूनिट को 2007 में शुरू किया गया था। कंपनी देश भर में 14 ब्रुअरीज (शराब बनाने के कारखाने) चलाती है। इनमें से 8 का मालिकाना हक कंपनी के पास है। 6 कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। वहीं कार्ल्सबर्ग ग्रुप की शुरुआत 1847 में हुई थी।
कार्ल्सबर्ग इंडिया की सबसे करीबी लिस्टेड कॉम्पिटीटर, यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड है। एब्सोल्यूट वोदका और चिवास रीगल स्कॉच व्हिस्की बनाने वाली कंपनी पेरनोड रिकार्ड SA भी अपने भारतीय कारोबार की संभावित लिस्टिंग पर विचार कर रही है।
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