Clean Energy IPO: क्लीन एनर्जी सेक्टर में इस समय काफी हलचल है और कंपनियां तेजी से लिस्ट होने की तैयारी कर रही हैं। सिर्फ इसी वित्त वर्ष की बात करें तो रिन्यूएबस एनर्जी और सोलर मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन की कंपनियां आईपीओ के जरिए ₹20,000-25,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं। क्लीन एनर्जी सेक्टर की आईपीओ मार्केट में हालिया हलचल की बात करें तो पिछले वित्त वर्ष 2025 में नवंबर 2024 में एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी का ₹10 हजार करोड़ के आईपीओ आया था जोकि इस सेगमेंट में सबसे बड़ा था। इसके तहत शेयर ₹108 के भाव पर जारी हुए थे।
कौन-कौन सी कंपनियां हैं कतार में?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वित्त वर्ष केकेआर के निवेश वाली हीरो फ्यूचर एनर्जीज (Hero Future Energies) ₹4000-₹5000 करोड़ का आईपीओ ला सकती हैं और ब्रुकफील्ड की क्लीन मैक्स (Clean Max) भी इतना बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में है। मैन्युफैक्चरिंग साइड में बात करें तो सोलर मॉड्यूल बनाने वाले अवाडा ग्रुप (Avaada Group) की योजना ₹4,000-₹5,000 करोड़ का आईपीओ लाने की है। बेंगलुरु की एम्मवी (Emmvee) और कोलकाता हेडक्वार्टर वाली जुपिटर इंटरनेशनल (Jupiter International) दोनों, ₹2,500–₹3,000 करोड़ के आईपीओ के लिए जुटी हैं। कई अन्य कंपनियों ने पहले ही अपना आईपीओ ड्राफ्ट फाइल कर दिया है। कोलकाता की विक्रम सोलर (Vikram Solar) का लक्ष्य ₹1,500 करोड़, दिल्ली की सात्विक ग्रीन एनर्जी (Saatvik Green Energy) का लक्ष्य ₹1,150 करोड़, फुजियामा पावर सिस्टम्स (Fujiyama Power Systems) का लक्ष्य करीब ₹700 करोड़ और पीएमईए सोलर टेक सॉल्यूशंस (PMEA Solar Tech Solutions) का लक्ष्य करीब ₹600 करोड़ की नई पूंजी जुटाना है।
तेजी से बढ़ रहा ग्रीन सेक्टर
एक्सपर्ट्स के मुताबिक भारत तेजी से क्लीन एनर्जी की तरफ बढ़ रहा है और इसी को लेकर कंपनियां तेजी से आईपीओ मार्केट में एंट्री कर रही हैं ताकि आने वाले समय की तैयारियों को लेकर फंड जुटा सकें। भारत का लक्ष्य नॉन-फॉसिल फ्यूल इलेक्ट्रिसिटी कैपेसिटी यानी रिन्यूएबल सोर्सेज से बिजली उत्पादन की क्षमता वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 500 मेगावाट तक ले जानी का है। यह वर्ष 2047 यानी देश की आजादी के 100 साल पूरे होने पर उर्जा के मामले में आत्मनिर्भर और वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य का हिस्सा है। जेएसए लॉ फर्म के पार्टनर Arka Mookerjee का कहना है कि फॉसिल फ्यूल की बढ़ती कीमतें और उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों ने देशों को ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया है। उनका मानना है कि क्लीन एनर्जी में बड़े निवेश की जरूरत होगी और इस क्षेत्र की कंपनियां उत्पादन बढ़ाने के लिए फंडिंग की तलाश में हैं ताकि सरकार के लक्ष्यों को पूरा किया जा सके। यहां तक कि कोल सेक्टर की दिग्गज कंपनी कोल इंडिया ने भी रिन्यूएबल एनर्जी सब्सिडरी सीईएल राजस्थान अक्षय ऊर्जा की स्थापना की है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक क्लीन एनर्जी थीम में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी कई वजहों से है। आनंद राठी इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के एसोसिएट डायरेक्टर (डिजिटल एंड न्यू-एज बिजनेसेज) आकाश अग्रवाल का कहना है कि यह पूरी तरह से नीतियों के चलते है। इसे देश के रिन्यूएबल टारगेट, सोलर मैन्युफैक्चरिंग के लिए पीएलआई स्कीम और आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से तगड़ा सपोर्ट मिला है। इसके अलावा अधिक से अधिक कॉरपोरेट ग्रीन पावर को लेकर प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं जिससे डेवलपर्स को लंबे समय तक मांग अच्छी दिख रही है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि यह क्षेत्र नीति पर काफी निर्भर है, और टैरिफ या सब्सिडी में बदलाव से सेंटिमेंट में उतार-चढ़ाव दिख सकता है। इसके अलावा एक और अहम चुनौती सप्लाई चेन से जुड़ी है जैसे कि सोलर मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियां तेजी से यहां विस्तार कर रही हैं लेकिन पॉलीसिलिकॉन, सिल्वर पेस्ट और अहम केमिकल के लिए अभी भी ये बड़े पैमाने पर चीन या कुछ अन्य सप्लायर्स पर निर्भर हैं तो अगर इनकी सप्लाई में दिक्कत आती है तो कंपनियों का मार्जिन और काम करने की स्पीड प्रभावित हो सकती है।
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