Delhivery IPO : ग्रे मार्केट में आईपीओ प्राइस से नीचे आया शेयर, अब 24 मई को लिस्टिंग पर टिकी नजर

ग्रे मार्केट में सुस्त प्रतिक्रिया की वजह कमजोर कैश फ्लो के साथ कंपनी को लगातार हो रहा घाटा है। उसका आईपीओ प्राइस 462-487 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है

अपडेटेड May 20, 2022 पर 10:38 AM
31 दिसंबर 2021 तक के 9 महीने में कंपनी की कुल आय 442.54 करोड़ रुपये रही थी जो कि इसके पिछले साल 334.09 करोड़ रुपये पर रही थी

Delhivery IPO :  लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन स्टार्टअप डेल्हीवरी (Delhivery) का शेयर 24 मई को लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट (grey market) में IPO प्राइस से नीचे आ गया है।

आईपीओ (IPO) के लिए रिटेल और हाई नेटवर्थ इनवेस्टर्स की तरफ से सुस्त प्रतिक्रिया के बाद ग्रे मार्केट में कमजोर मांग दिख रही है। स्टॉक मे 1 मई को सबसे ज्यादा 7-8 रुपये का प्रीमियम देखने को मिला, जो बुधवार को घटकर 3-4 रुपये रह गया था। एक डीलर ने कहा, गुरुवार को इसमें 3-6 रुपये का डिस्काउंट बना हुआ है।

लगातार हो रहे घाटे का दिख सकता है असर


ग्रे मार्केट में सुस्त प्रतिक्रिया की वजह कमजोर कैश फ्लो के साथ कंपनी को लगातार हो रहा घाटा है। उसका आईपीओ प्राइस 462-487 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

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कंपनी को दिसंबर, 2021 में समाप्त नौ महीनों के दौरान 891.14 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था और वित्त वर्ष 21 में 416 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। दिसंबर, 2021 में समाप्त नौ महीने में डेल्हीवरी का रेवेन्यू 4,911 करोड़ रुपये रहा था, जबकि वित्त वर्ष 21 में रेवेन्यू 3,838 करोड़ रुपये रहा था।

लिस्टेड स्पेस में मौजूद हैं अच्छी कंपनियां

एनालिस्ट्स ने कहा, “कंपनी सेल्स की तुलना में 5.5 गुना प्राइस मांग रही है। अन्य सभी लॉजिस्टिक्स कंपनियां प्रॉफिट कमा रही हैं। फ्यूल कॉस्ट में बढ़ोतरी, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े मुद्दों को देखते हुए कॉस्ट की समस्या बनी रहेगी। लिस्टेड स्पेस में कई अच्छी कंपनियां मौजूद हैं जो पहले से प्रॉफिट कमा रही हैं और एक निवेशक के रूप में उन पर विचार किया जा सकता है।”

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ज्यादा है मार्केट कैप

एनालिस्ट्स का दावा है कि प्रतिस्पर्धी कंपनियों टीसीआई एक्सप्रेस (TCI Express), Blue Dart, Gati, VRL Logistics, Mahindra Logistics कुल मार्केट कैप डेल्हीवरी की 35,000 करोड़ रुपये की मार्केट कैप से कम है और ज्यादातर प्रतिस्पर्धी कंपनियां प्रॉफिट में हैं।

जेएसटी इनवेस्टमेंट्स में आईपीओ एक्सपर्ट आदित्य कोंडावर ने कहा, “भविष्य में भी इक्विटी बेचनी पड़ सकती है, क्योंकि लॉजिस्टिक्स एक भारी पूंजी खर्च वाला बिजनेस है। अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए, उन्हें बढ़ते हुए ऑर्डर पूरे करने के लिए फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना होगा, जिसेस कॉस्ट बढ़ेगी।”

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