शेयर बाजार में जारी अस्थिरता के बीच दो कंपनियों- वीनस पाइप्स एंड ट्यूब्स (Venus Pipes & tubes) और डेल्हीवेरी (Delhivery) के शेयर मंगलवार 24 मई को एक्सचेजों पर लिस्ट होने के लिए तैयार हैं। हालांकि ग्रे मार्केट में दोनों कंपनियों की लिस्टिंग को लेकर कोई खास उत्साह नहीं दिख रहे हैं और उनकी लिस्टिंग कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं।
बाजार जानकारों के मुताबिक, नए जमाने की लॉजिस्टिक कंपनी डेल्हीवेरी के शेयर सोमवार को ग्रे मार्केट में अपने 487 रुपये के इश्यू प्राइस से 5 रुपये कम पर ट्रेड कर रहे थे। हालांकि इनके शेयरों की ट्रेड की संख्या लगभग नगण्य थी।
डेल्हीवेरी का 5,235 करोड़ रुपये का इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) 11 मई से 13 मई के बीच बोली के खुला था और कंपनी ने इसके लिए 462 से 487 रुपये का प्राइस बैंड रखा था। कंपनी का इश्यू 1.63 गुना सब्सक्राइब हुआ था और सबसे अधिक बोली क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) ने लगाई थी। वहीं रिटेल निवेशकों, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) और कर्मचारियों का इस इश्यू को लेकर ठंडा रिस्पॉन्स रहा और उनका हिस्सा पूरा सब्सक्राइब भी नहीं हुआ था।
एक्सपर्ट कहा कहना है कि डेल्हीवेरी के वैल्यूएशन को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाया था और इसे महंगा बताया था। शायद यही कारण रहा कि निवेशकों ने इस आईपीओ से दूरी बनाकर रखी। इसके अलावा हाल में नए जमाने की कंपनियों के कई आईपीओ का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। इसके चलते भी निवेशक थोड़े सतर्क दिखे।
मंगलवार को वीनस पाइप्स एंड ट्यूबस के शेयर भी लिस्ट होने वाले हैं और सोमवार को इसके शेयर ग्रे मार्केट में 35-40 रुपये या 10-12 फीसदी के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे थे। कंपनी का इश्यू प्राइस 326 रुपये तय किया है। इस तरह ग्रे मार्केट कुछ प्रीमियम के साथ वीनस पाइप्स के शेयरों की लिस्टिंग को लेकर संकेत दे रहा है।
वीनस पाइप्स एंड ट्यूब्स ने अपने आईपीओ से 165.42 करोड़ रुपये जुटाए हैं और यह 11 मई से 13 मई के बीच बोली के खुला था। कंपनी ने इसके लिए 310 से 326 रुपये का प्राइस बैंड रखा था।
कंपनी का इश्यू 16.31 गुना सब्सक्राइब हुआ था और रिटेल निवेशकों ने अपने हिस्से के शेयरों के लिए 19 गुना अधिक बोली लगाई थी। इसके अलावा कंपनी को क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) से 12 गुना, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) से 15.7 गुना अधिक बोली मिली थी।
एक्सपर्ट का कहना है ग्रे मार्केट प्रीमियम और इसके आईपीओ को निवेशकों से मिले भारी सब्सक्रिप्शन से यह संकेत मिलता है कि इसकी लिस्टिंग कुछ बढ़त के साथ हो सकती है। हालांकि यह भी चीज भी ध्यान में रखना चाहिए कि कंपनी का इश्यू साइज काफी कम था, जिसकी वजह से भी सब्सक्रिप्शन के आंकड़े अधिक दिख रहे हैं।