Digit Insurance IPO : कनाडा के अरबपति प्रेम वत्स (Prem Watsa) के निवेश वाली डिजिट इंश्योरेंस IPO के जरिये 50 करोड़ डॉलर जुटाने पर विचार कर रही है। कंपनी 4.5 से 5 अरब डॉलर वैल्यूएशन पर यह धनराशि जुटाएगी। घटनाक्रम पर नजर रखने वाले तीन लोगों ने रॉयटर्स को यह जानकारी दी है।
डिजिट की स्थापना 2017 में की गई थी और अब यह आसान क्लेम सेटलमेंट जैसे बेहतर ग्राहक अनुभव की यूजर्स की जरूरत के साथ-साथ भारत के जनरल इंश्योरेंस बाजार को भुनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, देश में पिछले कुछ महीनों के दौरान आए आईपीओ का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। हाल ही में आए LIC के आईपीओ का प्रदर्शन भी अच्छा नहीं रहा है। शेयर बाजार में एलआईसी की लिस्टिंग उसके आईपीओ प्राइस से नीचे के स्तर पर हुई है और अभी भी इसके शेयर आईपीओ प्राइस से नीचे कारोबार कर रहे हैं।
जनवरी में लिस्टिंग की योजना
डिजिट (Digit) ने डील के लिए मॉर्गन स्टैनली और भारतीय इनवेस्टमेंट बैंक आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज को नियुक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह सितंबर तक बाजार नियामक को मसौदा दस्तावेज दाखिल करने और जनवरी में लिस्ट होने की योजना बना रही है।
डिजिट ने इसे “अटकलबाजी” बताते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। आईसीआईसीआई ने भी प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया, वहीं मॉर्गन स्टैनली ने इस संबंध में भेजे गई ईमेल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
इस महीने 4 अरब डॉलर वैल्यूएशन पर जुटाया फंड
इस महीने की शुरुआत में डिजिट 4 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर फंड जुटाया था। कंपनी अभी तक फैयरफैक्स के अलावा सोकोइया कैपिटल, ए91 पार्टनर्स और फेयरिंग कैपिटल से 40 करोड़ डॉलर जुटा चुकी है।
हाल में आया भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC का आईपीओ 7.8 फीसदी गिरावट के साथ बाजार में लिस्ट हुआ था। इससे पहले पिछले साल नवंबर में फिनटेक कंपनी पेटीएम ने 2 अरब डॉलर का IPO लॉन्च किया था। उधर, 2021 के बूम के बाद भारतीय स्टार्टअप्स के लिए पैसा जुटाना मुश्किल हो गया है।
आईपीओ के लिए 5 साल तक परिचालन की है शर्त
भारत के बीमा नियामक की तरफ से सेक्टर की कम से कम 5 साल पुरानी कंपनियों के लिए आईपीओ लाने की अनुमति है, जिस शर्त को डिजिट सितंबर तक पूरा करेगी। डिजिट की फेयरफैक्स के साथ नए शेयर जारी करके फंड जुटाने की योजना है। 30 फीसदी हिस्सेदारी के साथ फेयरफैक्स सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है, जो आईपीओ के जरिये अपनी हिस्सेदारी घटा सकती है।