Hindustan Zinc : कैबिनेट ने हिंदुस्तान जिंक लि. में सरकार की पूरी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी है। सीएनबीसी आवाज ने बुधवार, 25 मई को सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। हिंदुस्तान जिंक (Hindustan Zinc) की पैरेंट कंपनी वेदांता लि. (Vedanta Ltd) की उसमें 64.92 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि सरकार के पास जिंक का खनन करने वाली कंपनी की 29.5 फीसदी हिस्सेदारी है। समझा जाता है कि डिसइनवेस्टमेंट (divestment) का ऑफर साइज बाद में तय किया जाएगा।
हिंदुस्तान जिंक पर है 2,844 करोड़ का कर्ज
वित्त वर्ष 22 तक वेदांता पर कुल 53,583 करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि हिंदुस्तान जिंक का कुल कंसॉलिडेटेड कर्ज 2,844 करोड़ रुपये है। नवंबर, 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को हिंदुस्तान जिंक की अपनी बाकी 29.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की अनुमति दे दी थी। वर्तमान बाजार मूल्य पर सरकार की Hindustan Zinc में बाकी हिस्सेदारी की वैल्यू 38,000 करोड़ रुपये है।
एनालिस्ट्स का अनुमान, शेयर पर बढ़ेगा दबाव
एनालिस्ट्स का अनुमान है कि बड़ी हिस्सेदारी बिकने की खबर के चलते आगे हिंदुस्तान जिंक के स्टॉक पर दबाव बना रहेगा। सरकार अपनी हिस्सेदारी को भुनाने पर विचार कर रही है, इसलिए इंडस्ट्री को मिलने वाले प्रीमियम में कमी आ सकती है क्योंकि लिक्विडिटी बढ़ जाएगी और किसी भी तरह हिस्सेदारी बेचने से सरकार की बोर्ड में मौजूदगी खत्म हो जाएगी।
घट जाएगा वैल्यूएशन प्रीमियम
एनालिस्ट्स ने कहा, “कंपनी को वैल्यूएशंस पर भारतीय मेटल और माइनिंग कंपनियों की तुलना में अच्छा प्रीमियम हासिल है, जिसमें बोर्ड में सरकार की मौजूदगी का प्रीमियम भी शामिल है। हम लिक्विडिटी बढ़ने और बोर्ड में सरकार की मौजूदगी खत्म होने से वैल्यूएशन प्रीमियम पर जोखिम देखते हैं।”
एनालिस्ट्स ने कहा, “यह ट्रांजेक्शन मार्केट सेल के रूप में होने जा रही है। हमने इतनी बड़ी बिक्री शायद ही पहले कभी देखी है। काफी हद तक संभावना है कि सरकार नियमित अंतराल पर अपने शेयर बेचेगी।”
दोपहर 3 बजे हिंदुस्तान जिंक के शेयर बीएसई पर 4.85 फीसदी की मजबूती के साथ 310.10 रुपये पर कारोबार कर रहे हैं। हालांकि, इंट्राडे में शेयर में 7 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिली।