दिल्ली हाईकोर्ट ने Zostel की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें उसने आईपीओ के पहले OYO में 7 फीसदी हिस्सेदारी के दावे को मंजूरी देने की मांग की है। हाईकोर्ट के इस फैसले को सॉफ्ट बैंक के निवेश वाली हॉस्पिटैलिटी फर्म OYO के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस श्री हरिशंकर के अध्यक्षता वाली सिंगल जज की बेंच ने 14 फरवरी को यह फैसला दिया है।
बता दें कि Zo Rooms जो कि OYO के साथ कानूनी लड़ाई में लगी हुई है उसने हाईकोर्ट में एक अपील दाखिल की थी जिसमें पिछले साल OYO के खिलाफ अपने अधिकारों की रक्षा की अपील की थी। शेयर होल्डिंग से जुड़े इस विवाद के कारण Zostel,OYO के आईपीओ की प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रही थी लेकिन हाईकोर्ट के आज आए फैसले में Zostel के इस प्रयास को बड़ा झटका लगा है और अदालत ने उसकी मांग को खारिज कर दिया है।
Zostel और OYO के बीच इस विवाद की जड़ 2015 तक जाती है। जब Zostel हॉस्पिटेलिटी के मालिकाना हक वाली बजट हॉटेल चेन Zo Rooms के कारोबार को दोनों कंपनियों के बीच होने वाले मर्जर की बातचीत की असफलता के बाद बंद कर दिया गया था। दोनों कंपनियों ने 26 नवंबर 2015 को एक अधिग्रहण करार के लिए बातचीत की प्रक्रिया शुरु की थी जो कि बाद में संपन्न नहीं हो सकी।
Zo Rooms का दावा है कि उसने इस करार के तहत अपने दायित्व को पूरा किया था और अपने करोबार को ट्रांसफर भी कर दिया था लेकिन OYO ने करार के तहत निर्धारित अपनी 7 फीसदी हिस्सेदारी का ट्रांसफर नहीं किया जिसके बाद यह मामला ओर्बिट्रेशन के पास गया था।
गौतरलब है कि OYO अपने 1.2 अरब डॉलर के आईपीओ के लिए सेबी के मंजूरी का इंतजार कर रही है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक कंपनी बाजार के उतार-चढ़ाव भरे माहौल को देखते हुए अपने वैल्यूएशन पर फिर से विचार कर सकती है।
पिछले कुछ महीनों के दौरान भारतीय और ग्लोबल खासकर अमेरिका के बाजारों में इंटरनेट आधारित नई पीढ़ी के स्टॉक्स में भारी बिकवाली देखने को मिली है और निवेशक ऐसे कंपनियों के शेयरों को लेकर काफी सतर्क नजर आ रहे हैं। पिछले साल हुई लिस्टिंग के दौरान Zomato के शेयरों में भारी बिकवालीदेखने को मिली है और यह वर्तमान में अपने सबसे निचले स्तरों के करीब नजर आ रहा है। इसी तरह Paytm,Nykaa और PB Fintech जैसे कंपनियां भी दबाव में दिख रही है।
बताते चलें कि OYO ने पिछले साल सितंबर में सेबी में अपने आईपीओ से संबंधित अर्जी दाखिल की थी। वर्तमान में कंपनी सेबी द्वारा पूछे गए सवालों और इस पर अपने स्पष्टीकरण देने के प्रक्रिया में है।