जब कोई प्राइवेट कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होने का प्लान करती है तो वह आमतौर पर अपना इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) लेकर आती है। IPO के जरिए प्राइमरी मार्केट में आम निवेशकों के लिए सिक्योरिटीज या शेयर बेचने के लिए रखे जाते हैं। शेयर बाजार में लिस्टिंग से प्राइवेट कंपनी पब्लिक कंपनी बन जाती है। IPO की बात चलने पर मुख्य रूप से दो तरह के इश्यू सामने आते हैं- फिक्स्ड प्राइस इश्यू और बुक बिल्डिंग इश्यू। कुछ IPO दोनों के कॉम्बिनेशन वाले भी हो सकते हैं। लेकिन आखिर यह फिक्स्ड प्राइस मेथड और बुक बिल्डिंग मेथड है क्या? आइए जानते हैं...
BSE की साइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, इस तरह के IPO में वह कीमत जिस पर सिक्योरिटीज या शेयर ऑफर किए जाते हैं और आगे अलॉट किए जाएंगे, वह पहले से ही तय कर दी जाती है। निवेशकों को उसी तय कीमत पर IPO में शेयरों के लिए आवेदन करना होता है।
इस तरह के IPO में कंपनी एक प्राइस बैंड तय करती है। जैसे कि 100-110 रुपये प्रति शेयर, 200-220 रुपये प्रति शेयर। IPO में निवेशक प्राइस बैंड के अंदर ही बोली लगा सकते हैं। फाइनल इश्यू प्राइस यानि कि जिस भाव पर सिक्योरिटीज जारी की जाएंगी, IPO बंद होने के बाद इश्यू को मिली मांग के आधार पर तय होता है। अक्सर यह अपर प्राइस बैंड यानि कि प्राइस बैंड की ऊपरी सीमा होता है। यह प्रक्रिया संस्थागत (इंस्टीट्यूशनल) और खुदरा (रिटेल) दोनों तरह के निवेशकों के लिए होती है। इस तरह के IPO आम तौर पर 3 दिनों के लिए खुले रहते हैं। बोली लगाने वाले इश्यू बंद होने से पहले अपनी बोलियों में बदलाव कर सकते हैं।
डिमांड और रिजर्व कोटे के मामले में क्या अंतर
फिक्स्ड प्राइस इश्यू में बेचने के लिए रखे गए शेयरों को कैसी मांग मिल रही है, यह इश्यू बंद होने के बाद ही पता चलता है। वहीं बुक बिल्डिंग इश्यू में ऑफर किए गए शेयरों को लेकर मांग बिडिंग पीरियड के दौरान BSE की वेबसाइट पर रियल-टाइम बेसिस पर उपलब्ध रहती है। IPO के रिजर्व कोटे की बात करें तो फिक्स्ड प्राइस इश्यू में पेश किए गए शेयरों में से 50 प्रतिशत शेयर 2 लाख रुपये से कम की एप्लीकेशन यानि कि रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व होते हैं। बाकी के शेयर इससे अधिक राशि की एप्लीकेशन के लिए रहते हैं।
वहीं बुक बिल्डिंग इश्यू में पेश किए गए शेयरों में से 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व होता है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।