Indegene IPO: इंडीजीन का आईपीओ कैसा है, क्या आपको इस इश्यू में निवेश करना चाहिए?

इंडीजीन के इश्यू में 8 मई तक निवेश किया जा सकता है। कंपनी ने आईपीओ में शेयर का प्राइस बैंड 430-452 रुपये रखा है। कंपनी लाइफ साइंस इंडस्ट्री को कई तरह के सॉल्यूशंस उपलब्थ कराती है

अपडेटेड May 06, 2024 पर 4:40 PM
इंडीजीन के इश्यू में 8 मई तक निवेश किया जा सकता है। कंपनी ने आईपीओ में शेयर का प्राइस बैंड 430-452 रुपये रखा है। कंपनी लाइफ साइंस इंडस्ट्री को कई तरह के सॉल्यूशंस उपलब्थ कराती है

इंडीजीन का आईपीओ निवेश के लिए 6 मई को खुल गया है। यह कपनी लाइफ साइंस इंडस्ट्री को डिजिटल आधारित कमर्शियल सर्विसेज उपलब्ध कराती है। कंपनी का यह आईपीओ प्राइस बैंड के ऊपरी लेवर पर 1,842 करोड़ रुपये का है। कंपनी ने एक शेयर के लिए 430-452 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। इस इश्यू में 8 मई तक निवेश किया जा सकता है। कंपनी इस इश्यू में 760 करोड़ रुपये मूल्य के नए स्टॉक्स जारी करेगी। इसमें से 391 करोड़ रुपये का इस्तेमाल वह एक लोन चुकाने के लिए करेगी। यह लोन उसने पिछले साल मार्च में लिया था।

Carlyle और Brighton Park ओएफएस में अपनी हिस्सेदारी बेचेंगी

इस आईपीओ में शामिल ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए पीई फर्म Carlyle और Brighton Park अपनी हिस्सेदारी बेचेंगी। इन दोनों पीई फर्मों ने इस कंपनी में फरवरी 2021 में प्रति शेयर 201 के भाव पर निवेश किया था। इस तरह करीब तीन साल में उन्हें अपने पैसे पर 2.23 गुना रिटर्न कमाने का मौका मिलेगा। Indegene की शुरुआत 1998 में हुई थी। इसके डिजिटल सॉल्यूशंस से क्लाइंट को ड्रग डेवलपमेंट, रेगुलेटर सबमिशंस, फार्माकोविजिलेंस और अपने प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग में मदद मिलती है।


चार सेगमेंट में बंटा है इंडीजीन का बिजनेस

इस कंपनी का बिजनेस चार सेगमेंट में बंटा है। इनमें एंटरप्राइज कमर्शियल सॉल्यूशंस (ECS), ओमिनीचैनल एक्टिवेशन सॉल्यूशंस, एंटरप्राइज मेडिकल सॉल्यूशंस (EMS) और एंटरप्राइज क्लिनिकिल सॉल्यूशंस (ECS) शामिल हैं। पहले दो सॉल्यूशंस लाइफ साइंसेज कंपनियों के कमर्शियल फंक्शंस में मदद करते हैं। EMS और ECS मेडिकल और आरएंडडी से जुड़ी सर्विसेज देते हैं।

रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा ईसीएस से आता है

कंपनी का 59 फीसदी सेल्स ECS से आता है। इसमें कंपनी डिजिटल मार्केटिंग ऑपरेशंस उपलब्ध कराती है। ओमिनीचैनल एक्टिवेशन की सेल्स में 12 फीसदी हिस्सेदारी है। यह काम पहले मेडिकल रिप्रजेंटेटिव करते थे। इसमें कंपनी हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के बीच फार्मा प्रोडक्ट्स को प्रमोट करने के लिए प्रोपरायटी एनालिटिक्स का इस्तेमाल करती है।

कोविड से पहले कंपनी का EBITDA मार्जिन 6-13 फीसदी था

इंडीजेन के ऑपरेटिंग रेवेन्यू का सीएजीआर FY15-FY23 के बीच 33 फीसदी रहा है। कोविड की शुरुआत के बाद कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ में उछाल आया था। कोविड से पहले कंपनी का EBITDA मार्जिन 6-13 फीसदी के बीच था। FY20 और FY21 के दौरान यह 22-24 फीसदी तक पहुंच गया। अब यह घटकर करीब 18-19 फीसदी पर आ गया है। कंपनी ने इस साल मार्च में 1.1 करोड़ यूरो में ट्राइलॉजी राइटिंग एंड कंसल्टिंग का अधिग्रहण किया था। इससे पहले उसने Cult Health का अधिग्रहण किया था।

कोविड के बाद फार्मा कंपनियों का फोकस डिजिटाइजेशन पर बढ़ा है

कोविड के बाद ज्यादातर फार्मा कंपनियां अपने कामकाज को डिजिटल बना रही हैं। एवरेस्ट ग्रुप के एक अनुमान के मुताबिक, लाइफ साइंस इंडस्ट्री के ऑपरेशनल खर्च में सेल्स और मार्केटिंग की हिस्सेदारी 35 फीसदी है। 23 फीसदी हिस्सेदारी ड्रग डिस्कवरी और क्लिनिकल ट्रायल की है। 16 फीसदी हिस्सेदारी रेगुलेटरी अफेयर्स की है। इंडीजीन को रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा अमेरिका और यूरोप से आता है।

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लिस्टिंग के बाद एग्जिक्यूशन पर रखनी होगी नजर

यह इंडस्ट्री बहुत बहुत कॉम्पटिटिव है। यह कॉम्पिटिशन कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन, लाइफ साइंस स्पेशियलिस्ट सर्विस प्रोवाइडर्स, डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म और आईटी फर्मों की तरफ से आता है। इस फील्ड में सफलता डोमेन को लेकर अपनी विशेषज्ञता पर निर्भर करती है। आगे ग्रोथ में टैलेंट और आर्टिफिशियल इंटिलेजेंस में निवेश का बड़ा हाथ होगा। कंपनी ने शेयर का जो प्राइस तय किया है, उससे वैल्यूएशन ठीक लगता है। निवेशक अगर आईपीओ में निवेश करते हैं तो लिस्टिंग के बाद उन्हें एग्जिक्यूशन पर नजर रखनी होगी।

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