FY26 में भारत में 360 से ज्यादा IPO से जुटाए गए ₹1.9 लाख करोड़, मेनबोर्ड सेगमेंट की लिस्टिंग्स ने तोड़ा रिकॉर्ड

मेनबोर्ड IPOs से जुटाई गई राशि में ऑफर फॉर सेल का दबदबा बना रहा और इसकी हिस्सेदारी 61 प्रतिशत रही। FY26 में 258 SME IPO के जरिए 12,030 करोड़ रुपये जुटाए गए। यह आंकड़ा पिछले 3 वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है

अपडेटेड Aug 10, 2026 पर 4:29 PM
भारतीय पूंजी बाजार की मजबूती को घरेलू निवेशकों की अच्छी भागीदारी और लगातार बढ़ते इनवेस्टर बेस का सपोर्ट मिला।

देश की कंपनियों ने बीते वित्त वर्ष 2025-26 में 360 से अधिक IPOs के जरिए करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए। ग्रांट थॉर्नटन भारत की सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं, भूराजनीतिक तनाव और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनियों की IPO के जरिए पूंजी जुटाने की गतिविधियां मजबूत बनी रहीं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों की रुचि अब उन कंपनियों की ओर शिफ्ट हुई है जिनकी बुनियाद मजबूत है, गवर्नेंस बेहतर है, आय में वृद्धि की स्पष्ट संभावना है और वैल्यूएशंस अधिक संतुलित हैं।

मेनबोर्ड सेगमेंट में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रिकॉर्ड 109 IPO आए, जिनके माध्यम से करीब 1.77 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए। इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2024-25 में 80 मेनबोर्ड IPOs के जरिए 1.63 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए थे। मेनबोर्ड IPOs से जुटाई गई राशि में ऑफर फॉर सेल (OFS) का दबदबा बना रहा और इसकी हिस्सेदारी 61 प्रतिशत रही। नए शेयरों के इश्यू का हिस्सा बढ़कर 39 प्रतिशत हो गया।

लघु एवं मझोले उद्यम (SME) सेक्टर के IPOs की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में 258 SME IPO के जरिए 12,030 करोड़ रुपये जुटाए गए। यह आंकड़ा पिछले 3 वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है। वित्त वर्ष 2024-25 में 242 SME IPO से 9,900 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय पूंजी बाजार की मजबूती को घरेलू निवेशकों की अच्छी भागीदारी और लगातार बढ़ते इनवेस्टर बेस का सपोर्ट मिला। हालांकि, वैश्विक घटनाक्रमों, कमोडिटी की कीमतों और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव का निवेशकों के फैसलों पर असर बढ़ा है।


ओवर सब्सक्रिप्शन का औसत घटकर 39 गुना

निवेशकों के बदले रुख का असर IPO के लिए बोली और लिस्टिंग परफॉरमेंस में भी दिखाई दिया। वित्त वर्ष 2025-26 में IPO के लिए ओवर सब्सक्रिप्शन का औसत घटकर 39 गुना रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 71 गुना था। यह कंपनियों की वैल्यूएशंस, गवर्नेंस के स्टैंडर्ड्स और कारोबार की मजबूती को लेकर बढ़ती जांच को दर्शाता है। इसी तरह IPO के लिस्टिंग डे पर मिलने वाला एवरेज गेन वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 7 प्रतिशत रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 29 प्रतिशत था।

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पीटीआई के मुताबिक, ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और CFO एडवाइजरी लीडर करण मारवाह का कहना है, ‘‘आज के IPO बाजार में सफलता केवल लिस्ट होने से तय नहीं होती, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करती है कि कोई कंपनी पब्लिक कंपनी के रूप में काम करने के लिए कितनी तैयार है। उसके पास निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए बेहतर संचालन व्यवस्था, अनुशासन और विश्वसनीयता है या नहीं।’’

रिपोर्ट में कहा गया कि निवेशक अब केवल कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर ही ध्यान नहीं देते, बल्कि वे कंपनियों के कामकाज के मानकों, जानकारी साझा करने की गुणवत्ता, पूंजी के इस्तेमाल की योजना और लिस्टेड कंपनी के रूप में प्रभावी संचालन की क्षमता को भी परख रहे हैं।

आगे भारत का IPO बाजार मजबूत बने रहने की उम्मीद

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में भारत का IPO बाजार मजबूत बने रहने की उम्मीद है। घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, अर्थव्यवस्था की स्ट्रक्चरल ग्रोथ और बढ़ते इनवेस्टर बेस से IPO मार्केट को सपोर्ट मिलता रहेगा। जिन कंपनियों की बुनियाद मजबूत होगी और जो IPO के लिए बेहतर तैयारी के साथ आएंगी, वे पब्लिक मार्केट से पूंजी जुटाने और लिस्ट होने के बाद भी निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में अधिक सफल रहेंगी।

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