रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी और बाजार में नकदी की कमी के बावजूद, ग्रांट थॉर्नटन भारत के प्रशांत मेहरा का मानना है कि मौजूदा वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही यानी मार्च तिमाही में IPO बाजार में काफी गतिविधियां देखने को मिलेंगे।
साल 2022 की पहली छमाही में 17 कंपनियों ने अपना IPO (इनीशियल पब्लिक ऑफर) लॉन्च किया था, जिसके जरिए उन्होंने 6 अरब डॉलर जुटाया था। इसमें से 2.8 अरब डॉलर अकेले लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) ने जुटाया था। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ था। इसके अलावा पहली छमाही में लॉजिस्टिक कंपनी डेल्हीवेरी और FMCG कंपनी रुचि सोया ने क्रमश: 0.7 अरब डॉलर और 0.6 अरब डॉलर जुटाया था।
हालांकि पिछले कुछ महीनों से शेयर बाजार में भारी अस्थिरता देखी जा रही है, जिसके चलते पेटीएम और एलआईसी सहित कई बड़ी कंपनियों की वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आई है।
बढ़ती महंगाई और क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उछाल जैसी वजहों ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर किया है। RBI ने एक महीने के अंदर अपने प्रमुख नीतिगत दर, रेपो रेट में 0.90 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इसने निवेशकों को अपना पैसा शेयर बाजारों से बाहर निकालने के लिए प्रेरित किया है।
मेहरा साल 2022 की पहली छमाही की तुलना इस दौरान हुए डील, निवेश और अगले साल तक यह कितना प्रभावी रहेंगे, इसके आधार पर करते हैं। मेहरा का कहना है कि मार्च तिमाही के दौरान निवेशकों का सेंटीमेंट पॉजिटव रहने की उम्मीद है।
ग्रांट थॉर्नटन भारत की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 की पहली छमाही में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए निवेश में साल 2011 की पहली छमाही के बाद सबसे अधिक गिरावट देखी गई है। QIP के जरिए सात कंपनियों ने 0.7 अरब डॉलर जुटाए। इंडियन होटल्स एंड रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया लिमिटेड ने QIP के जरिए अधिकतर फंड जुटाया।
मेहरा का कहना है कि जब विदेशी निवेशकों के पास पूंजी उपलब्ध होगी, तो वह वापस भारत में निवेश के लिए लौटेंगे। नए साल की शुरुआत में ऐसी उम्मीद की जा सकती है।
स्टार्टअप्स के बारे में मेहरा ने कहा कि भारत में खपत अपने ऑल-टाइम हाई पर है, ऐसे में देश में निवेश आता रहेगा। स्टार्टअप्स, भविष्य की इंडस्ट्रीज हैं और वैल्यूएशन वाजिब होने पर वह निवेश को आकर्षित करना जारी रखेंगी।