LIC का आईपीओ आखिरी दिन तीन गुना सब्सक्राइब हुआ। यह सरकार के लिए राहत की बात है। यह आईपीओ ऐसे वक्त ओपन हुआ था, जब स्टॉक मार्केट का सेंटिमेंट बहुत कमजोर था। इस महीने अब तक शेयर बाजार 4.5 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। ऐसे में एलआईसी जैसे बड़े आईपीओ का पूरी तरह सब्सक्राइब होना बड़ी बात है।
सोमवार शाम साढ़े चार बजे तक यह इश्यू 2.95 गुना सब्सक्राइब हो गया था। रिटेल इनवेस्टर्स का पोर्शन 1.99 गुना सब्सक्राइब हुआ। एंप्लॉयीज का कोटा 4.39 गुना भरा, जबकि पॉलिसीहोल्डर्स के लिए रिजर्व कोटा 6.10 फीसदी सब्सक्राइब हुआ। पॉलिसीहोल्डर्स के कोटे में सबसे ज्यादा रिस्पॉन्स मिलने की वजह इस कैटेगरी को मिलने वाला सबसे ज्यादा डिस्काउंट हो सकता है।
एलआईसी का आईपीओ 4 मई को ओपन हुआ था। इस आईपीओ के जरिए सरकार एलआईसी में अपनी 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है। 2 मई को उसने एंकर इनवेस्टर्स को हिस्सेदारी बेचकर 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हासिल किए थे। इस आईपीओ के जरिए हिस्सेदारी बेचने से सरकार को 21,000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है।
सरकार ने इस इश्यू में पॉलिसीहोल्डर्स को सबसे ज्यादा 60 रुपये प्रति शेयर का डिस्काउंट दिया था। इसके बाद प्रति शेयर 45 रुपये का डिस्काउंट रिटेल इनवेस्टर्स और एंप्लॉयीज को दिया था। इन तीनों कैटेगरी के लिए शेयर भी रिजर्व रखे गए हैं। रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 फीसदी, पॉलिसीहोल्डर्स के लिए 10 फीसदी और एंप्लॉयीज के लिए 0.7 फीसदी शेयर रिजर्व रखे गए हैं।
एलआईसी का आईपीओ स्टॉक मार्केट में 17 मई को लिस्ट होगा। स्टॉक मार्केट में अगर सेंटिमेंट कमजोर बना रहता है तो उसका असर शेयरों की लिस्टिंग पर पड़ सकता है। इससे उन इनवेस्टर्स को मायूसी हो सकती है, जिन्होंने फटाफट प्रॉफिट यानी लिस्टिंग गेंस के लिए इस इश्यू में बोली लगाई है।
बताया जाता है कि इस इश्यू को सबसे ज्यादा रिस्पॉन्स पश्चिमी राज्यों से मिला है। इनमें महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान शामिल हैं। शेयरों में इनवेस्ट करने के मामले में भी ये राज्य सबसे आगे हैं। इश्यू बंद होने से पहले रिटेल कैटगेरी में इस इश्यू को 60 लाख से ज्यादा एप्लिकेशंस मिले हैं। इससे पहले किसी आईपीओ में इतने ज्यादा रिटेल एप्लिकेशंस नहीं मिले थे।