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LIC IPO में इनवेस्ट करने से खुद को रोक नहीं पाए फॉरेन इनवेस्टर्स, अंतिम घंटों में जमकर लगाई बोली

फॉरेन इनवेस्टर्स ने संस्थागत खरीदारों के लिए रिजर्व हिस्से के 61 फीसदी तक बोली लगाई। यह कैटेगरी करीब तीन गुना सब्सक्राइब हुई है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 10, 2022 पर 10:53 AM
LIC IPO में इनवेस्ट करने से खुद को रोक नहीं पाए फॉरेन इनवेस्टर्स, अंतिम घंटों में जमकर लगाई बोली
इस आईपीओ में एंकर इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व शेयरों के लिए कई विदेशी सॉवरेन फंडों ने दिलचस्पी दिखाई। लेकिन, इस कैटेगरी में भी ज्यादा इनवेस्ट घरेलू म्यूचुअल फंडों ने किया।

LIC के आईपीओ में बोली लगाने से विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) खुद को रोक नहीं सके। उन्होंने इश्यू बंद होने से ठीक पहले के कुछ घंटों में जमकर बोली लगाई। पिछले कुछ समय से फॉरेन इनवेस्टर्स इंडियन मार्केट में बिकवाली कर रहे हैं। अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने से इंडिया सहित उभरते बाजारों का आकर्षण घटा है। उधर, क्राइसिस की वजह से अनिश्चितता बढ़ गई है।

फॉरेन इनवेस्टर्स ने संस्थागत खरीदारों के लिए रिजर्व हिस्से के 61 फीसदी तक बोली लगाई। यह कैटेगरी करीब तीन गुना सब्सक्राइब हुई है। एलआईसी का आईपीओ 4 मई को खुला था। 9 मई यानी सोमवार को यह बंद हो गया। सरकार इस आईपीओ के जरिए एलआईसी में अपनी 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है।

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इस आईपीओ में एंकर इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व शेयरों के लिए कई विदेशी सॉवरेन फंडों ने दिलचस्पी दिखाई। लेकिन, इस कैटेगरी में भी ज्यादा इनवेस्ट घरेलू म्यूचुअल फंडों ने किया। यह बदलते ट्रेंड का संकेत हो सकता है। एंकर पोर्शन में बोली लगाने वाले विदेशी फंडों में नार्वे और सिंगापुर के सॉवरेन फंड शामिल थे।

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