LIC का आईपीओ आखिरी दिन दोपहर 2:34 बजे तक 2.51 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। इसे सबसे ज्यादा रिस्पॉन्स पॉलिसीहोल्डर्स से मिला है। यह कैटेगरी 5.71 गुना सब्सक्राइब हुई है। एलआईसी के एंप्लॉयीज ने भी इसमें खूब दिलचस्पी दिखाई है। इस कोटे में यह इश्यू 4 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ है।
बताया जाता है कि इस आईपीओ में सबसे ज्यादा बोली पश्चिमी राज्यों के इनवेस्टर्स ने लगाई है। इनमें महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान शामिल हैं। शेयरों में निवेश के लिहाज से भी ये राज्य दूसरों से आगे हैं। रिटेल कैटेगरी में यह इश्यू 1.84 गुना सब्सक्राइब हुआ है। बताया जाता है कि इसमें पश्चिमी राज्यों के इनवेस्टर्स की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।
एलआईसी इस इश्यू के तहत कुल 16.2 करोड़ शेयर जारी करेगी। इसके मुकाबले उसे 40 करोड़ शेयरों के लिए बोली मिली है। एलआईसी के शेयर स्टॉक एक्सचेंजों में 17 मई को लिस्ट हो जाएंगे। मार्केट के जानकारों का कहना है कि अगर सेंटिमेंट में सुधार नहीं होता है तो एलआईसी के शेयरों की लिस्टिंग पर असर पड़ सकता है।
इस महीने की शुरुआत से अब तक सेंसेक्स 4.5 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। आईपीओ के आखिरी दिन भी स्टॉक मार्केट में कमजोरी रही। इसका असर एलआईसी के आईपीओ पर पड़ा है। इस इश्यू के खुलने के बाद से मार्केट में कमजोरी बनी हुई है।
एलआईसी का आईपीओ 17 जून को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होगा। इस आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी की एक वजह उन्हें मिलने वाला डिस्काउंट है। एलआईसी ने पॉलिसीहोल्डर्स को सबसे ज्यादा 60 रुपये प्रति शेयर का डिस्काउंट दिया है। यही वजह है कि इस कैटेगरी में यह इश्यू 5 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ है।
रिटेल इनवेस्टर्स को इस आईपीओ में प्रति शेयर 45 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है। रिटेल कैटेगरी में यह इश्यू आज शाम तक 2 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब ह जाने की उम्मीद है। 35 फीसदी कोटा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए तय है।
देश का यह सबसे बड़ा आईपीओ 4 मई को खुला था। इस आईपीओ का इंतजार लंबे समय से था। सरकार ने पहले इस आईपीओ से 60,000 करोड़ रुपये जुटाने का प्लान बनाया था। लेकिन, यूक्रेन क्राइसिस और इंटरेस्ट बढ़ने की वजह से इंडिया सहित दुनियाभर के स्टॉक मार्केट में गिरावट आ गई। इससे सरकार ने इश्यू का आकार घटा दिया।