LIC के आईपीओ में बोली लगाने वाले करोड़ों इनवेस्टर्स के लिए खबर अच्छी नहीं है। ग्रे मार्केट में एलआईसी के शेयर का प्रीमियम जीरो से नीचे चला गया है। ग्रे मार्केट में शेयर के प्रीमियम से यह संकेत मिलता है कि बीएसई और एनएसई में उसकी लिस्टिंग कैसी रहेगी। 17 मई को दोनों स्टॉक एक्सचेंजों में एलआईसी के शेयर लिस्ट होंगे। खास बात यह है कि इस इश्यू में सबसे ज्यादा दिलचस्पी रिटेल इनवेस्टर्स ने दिखायी है।
इस इश्यू में पॉलिसीहोल्डर्स का कोटा सबसे ज्यादा 6.12 गुना सब्सक्राइब हुआ। कुल अप्लिकेशंस में 60 फीसदी पॉलिसीहोल्डर्स के थे। एलआईसी के कर्मचारियों ने भी इस आईपीओ में जमकर बोली लगाई। इस वजह से एंप्लॉयीज कोटा 4.40 गुना सब्सक्राइब हो गया। रिटेल इनवेस्टर्स का पोर्शन 1.99 गुना सब्सक्राइब हुआ। नॉन-इंस्टीट्यूशनल कैटेगरी 2.91 सब्सक्राइब हुई। क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल बायर्स का कोटा 2.83 गुना सब्सक्राइब हुआ।
ग्रे मार्केट में एलआईसी के शेयर पर प्रीमियम (GMP) निगेटिव हो गया। एक ट्रेडर ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, "एक समय ग्रे मार्केट में एलआईसी के शेयर पर प्रीमियम 93-95 रुपये तक पहुंच गया था। उसके बाद से यह लगातार गिरा है। 5 मई को प्रीमियम सिर्फ 8-10 रुपये रह गया था। 6 मई को यह 10 रुपये हो गया था। बुधवार को यह घटकर माइनस 15 पैसे रह गया।"
अगर एलआईसी के शेयरों की लिस्टिंग इश्यू प्राइस से कम पर होती है तो लिस्टिंग गेंस के मकसद से बोली लगाने वाले इनवेस्टर्स को बहुत मायूसी होगी। बताया जाता है कि एलआईसी के आईपीओ से पहले बड़ी संख्या में डीमैट अकाउंट खुले हैं। सिर्फ अप्रैल में 40 लाख डीमैट अकाउंट खुलने की खबर है। इस साल जनवरी से अप्रैल के दौरान एक करोड़ डीमैट अकाउंट खुले हैं।
नए डीमैट अकाउंट ओपन कराने वाले लोगों में काफी संख्या में एलआईसी के पॉलिसीहोल्डर्स हैं। चूंकि, एलआईसी ने पॉलिसीहोल्डर्स को प्रति शेयर 60 रुपये का डिस्काउंट दिया है, जिससे इस आईपीओ में निवेश करने की उनकी चाहत बढ़ गई। ये ऐसे लोग हैं, जिन्होंने पहले कभी स्टॉक मार्केट में पैसे नहीं लगाए गए हैं। अगर एलआईसी का शेयर इश्यू प्राइस के करीब लिस्ट होता है तो उन्हें मामूली प्रॉफिट होगा। हालांकि, प्रति शेयर 60 रुपये का प्रॉफिट तय है, जो उन्हें डिस्काउंट के रूप में मिला है।