LIC IPO से पहले एक्टिव डीमैट अकाउंट की संख्या 63 फीसदी बढ़ी, जानिए अब कितनी हुई

एलआईसी की वैल्यूएशन पहले के अनुमान के मुकाबले बहुत कम लगाई गई है। पहले एलआईसी की वैल्यूएशन 16 से 17 लाख करोड़ रुपये लगाए जाने का अनुमान था। सरकार ने इसके मुकाबले सिर्फ 6 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन लगाई है

अपडेटेड Apr 27, 2022 पर 5:20 PM
पिछले 12 महीने में एक्टिव डीमैट अकाउंट की संख्या 63 फीसदी बढ़कर 8.97 करोड़ पहुंच गई है। ये आंकड़े मार्च आखिर तक के हैं।

LIC ने बुधवार को अपने आईपीओ की तारीख, प्राइस सहित जरूरी चीजों का ऐलान कर दिया। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी के आईपीओ को लेकर इनवेस्टर्स खासकर पॉलिसीहोल्डर्स और नए निवेशकों में उत्साह है। आईपीओ में शेयर की कीमत से यह साफ हो गया है कि लंबी अवधि में यह इनवेस्टमेंट खासा प्रॉफिट दे सकता है। इसलिए नए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट ओपन करने में लोगों कि दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद है।

देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड 902 से 949 रुपये रखा है। एलआईसी के पॉलिसीहोल्डर्स को इसमें 60 रुपये का डिस्काउंट मिलेगा। रिटेल इनवेस्टर्स को भी कंपनी प्रति शेयर 45 रुपये का डिस्काउंट देगी। DIPAM सेक्रेटरी तुहिन कांत पांडे ने कहा, "साइज घटकर 21,000 रुपये रह जाने के बाद भी एलआईसी का आईपीओ देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।"

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उन्होंने कहा, "हम एलआईसी को लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएटर के रूप में देखना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि एलआईसी की जो वैल्यूएशन तय की गई है, वह फेयर और अट्रैक्टिव है। दरअसल, एलआईसी ने आखिरी वक्त में आईपीओ की साइज घटाने का फैसला किया। शायद सरकार ने स्टॉक मार्केट की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रख यह फैसला लिया होगा। सरकार ने एक तरह से इस आईपीओ में दो बड़े बदलाव किए हैं।

सरकार ने पहला बदलाव यह किया है कि वह 5 फीसदी की जगह एलआईसी में अब सिर्फ 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। दूसरा, यह कि एलआईसी की वैल्यूएशन पहले के अनुमान के मुकाबले बहुत कम लगाई गई है। पहले एलआईसी की वैल्यूएशन 16 से 17 लाख करोड़ रुपये लगाए जाने का अनुमान था। सरकार ने इसके मुकाबले सिर्फ 6 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन लगाई है। कम वैल्यूएशन का मतलब है कि इस इश्यू में इनवेस्ट करने पर अच्छा मुनाफा मिल सकता है।

पिछले 12 महीने में एक्टिव डीमैट अकाउंट की संख्या 63 फीसदी बढ़कर 8.97 करोड़ पहुंच गई है। ये आंकड़े मार्च आखिर तक के हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि डीमैट अकाउंट की संख्या इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि लोग एलआईसी के आईपीओ में पैसे लगाना चाहते हैं। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (CDSL) के एक्टिव डीमैट की संक्या 6.3 करोड़ है। इनमें 37.2 लाख करोड़ रुपये का एसेट है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी (NSDl) के एक्टिव डीमैट अकाउंटट की संख्या 2.67 करोड़ है।

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