LIC के शेयरों की अगर स्टॉक मार्केट में कमजोर लिस्टिंग हुई तो देश के सबसे बड़े आईपीओ में पैसे लगाने वाले इनवेस्टर्स को बड़ी निराशा होगी। सरकार ने एलआईसी में अपनी 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर करीब 21,000 करोड़ रुपये हासिल किए हैं। इस इश्यू में देश के ऐसे लाखों लोगों ने इनवेस्ट किया है, जिनके पास एलआईसी की पॉलिसी है।
एलआईसी का शेयर मंगलवार को बीएसई और एनएसई में लिस्ट होंगे। यह लिस्टिंग ऐसे वक्त हो रही है, जब मार्केट की स्थिति ठीक नहीं है। यूक्रेन क्राइसिस और दुनियाभर में इंटरेस्ट बढ़ने से स्टॉक मार्केट्स में बड़ी गिरावट आई है। एलआईसी के शेयरों की कमजोर लिस्टिंग का असर बड़े इनवेस्टर्स पर तो ज्यादा नहीं पड़ेगा, लेकिन पहली बार स्टॉक मार्केट में इनवेस्ट करे लोगों को बड़ा झटका लग सकता है।
साल 2000 से लेकर अब तक 21 सरकारी कंपनियां स्टॉक मार्केट में लिस्ट हुई हैं। इनमें से आधी से ज्यादा कंपनियों के शेयर के प्राइस इश्यू प्राइस से नीचे चल रहे हैं। रिसर्च कंपनी टीएस लोंबार्ड के पॉलिटिकल एनालिस्ट अमिताभ दूबे ने कहा, "अगर बाजार में गिरावट आती है तो मूड बिगड़ सकता है। सरकार को आलोचना को सामना करना पड़ सकता है।"
एलआईसी की पहचान घर-घर में है। इसके देश में 2000 ब्रांचेज हैं। इस कंपनी में एक लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। यह 28.6 करोड़ पॉलिसी बेच चुकी है। 65 साल पुरानी यह कंपनी 500 अरब डॉलर के एसेट्स का प्रबंधन करती है। इसके 25 करोड़ पॉलिसीहोल्डर्स हैं, जो देश में कुल पॉलिसीहोल्डर्स का दो-तिहाई है।
एलआईसी का इश्यू करीब तीन गुना सब्सक्राइब हुआ था। पॉलिसीहोल्डर्स का कोटा सबसे ज्यादा छह गुना सब्सक्राइब हुआ था। एंप्लॉयीज का कोटा 4 गुना सब्सक्राइब हुआ था। एंकर कोटा में भी देश -विदेश के इनवेस्टर्स ने इनवेस्ट किए हैं। इनमें कुछ देशों के सॉवरेन वेल्थ फंड भी शामिल हैं। हालांकि, ज्यादा इनवेस्टमेंट घरेलू म्यूचुअल फंड कंपनियों ने किया है।
एलआईसी की लिस्टिंग से रिफॉर्म करने के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को मजूबती मिलेगी। हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों से स्टॉक मार्केट में हालात काफी कमजोर बने हुए हैं। इंडियन मार्केट्स में फॉरेन इनवेस्टर्स पिछले साल अक्टूबर से 24 अरब डॉलर की बिकवाली कर चुके हैं। पिछले पांच हफ्ते से सेंसेक्स और निफ्टी लगातार गिर रहे हैं।