LIC का आईपीओ सोमवार (9 मई) को बंद हो गया। 17 मई को स्टॉक एक्सचेंजों पर शेयर लिस्ट हो जाएंगे। क्या आपने इस आईपीओ में लिस्टिंग गेंस (LIC IPO Listing Gains) के लिए इनवेस्ट किया है? अगर हां तो आपकी दिलचस्पी यह जानने में होगी कि आपका फटाफट कितना प्रॉफिट बन सकता है। इसका पता तो 17 मई को चलेगा कि फटाफट प्रॉफिट के लिए आईपीओ में पैसे लगाने वाले निवेशकों को यह इश्यू खुश करेगा या मायूस।
ग्रे मार्केट में एलआईसी के शेयरों पर प्रीमियम काफी घट गया है। इससे बहुत ज्यादा लिस्टिंग गेंस की उम्मीद नहीं दिख रही है। ग्रे मार्केट में ज्यादातर अमीर इनवेस्टर्स और ब्रोकर्स पैसे लगाते हैं। सरकार के एलआईसी की वैल्यूएशन घटाने के बाद उनकी दिलचस्पी इस शेयर में बढ़ी है।
एलआईसी ने पॉलिसीहोल्डर को प्रति शेयर 60 रुपये डिस्काउंट दिया है। रिटेल इनवेस्टर और एंप्लॉयीज को प्रति शेयर 45-45 रुपये का डिस्काउंट दिया गया है। एंकर इनवेस्टर्स, हाई नेटवर्थ इनवेस्टर्स और संस्थागत इनवेस्टर्स को कोई डिस्काउंट नहीं दिया गया है।
अभी ग्रे मार्केट में एलआईसी के शेयर पर 16 रुपये प्रीमियम चल रहा है। पॉलिसीहोल्डर्स को प्रति शेयर 60 रुपये का डिस्काउंट मिला है। इसका मतलब है कि अगर हम 949 रुपये शेयर का कट-ऑफ प्राइस मान लें तो डिस्काउंट के बाद फाइनल प्राइस प्रति शेयर 889 रुपये आएगा। अगर यह शेयर 16 रुपये के प्रीमियम के साथ लिस्ट होता है तो यह कम से कम 965 रुपये पर लिस्ट होगा।
अगर शेयर 965 रुपये पर लिस्ट होता है तो पॉलिसीहोल्डर को प्रति शेयर 76 रुपये का प्रॉफिट होगा। इस तरह अगर आपको शेयरों का एक लॉट एलॉट होता है तो प्रति शेयर 76 रुपये की दर से आपको कम से कम 1140 रुपये (15X76) का प्रॉफिट होगा। अगर आपने रिटेल इनवेस्टर्स कोटे में अप्लाई किया है तो 45 रुपये डिस्काउंट के बाद प्रति शेयर फाइनल प्राइस 904 रुपये होगा।
अगर शेयर 965 रुपये पर लिस्ट होता है तो प्रति शेयर आपको 61 रुपये का प्रॉफिट होगा। अगर आपको एक लॉट एलॉट होता है तो आपका कुल प्रॉफिट 915 रुपये (15X61) होगा। यह अनुमान ग्रे मार्केट में एलआईसी के शेयर पर चल रहे प्रीमियम के आधार पर लगाया गया है। अगर शेयर ज्यादा प्रीमियम के साथ लिस्ट होता है तो आपका प्रॉफिट बढ़ जाएगा।
ज्यादातर इनवेस्टर्स LIC के आईपीओ से फटाफट प्रॉफिट कमाना चाहते हैं। नए डीमैट अकाउंट के आंकड़ों से यह संकेत मिलता है। इस साल जनवरी से मार्च के दौरान 90 लाख से ज्यादा डीमैट अकाउंट ओपन हुए हैं। ये आंकड़े एनएसडीएल और सीडीएसएल के हैं। इस साल 31 मार्च तक कुल डीमैट अकाउंट की संख्या बढ़कर 8.97 करोड़ पहुंच गई है। 31 दिसंबर तक देश में कुल डीमैट अकाउंट की संख्या 8.06 करोड़ थी।