HMA Agro IPO Subscription 2nd Day: बफैलो मीट यानी बीफ एक्सपोर्ट करने वाली दिग्गज कंपनी एचएमए एग्रो का आधा आईपीओ भर चुका है। 480 करोड़ रुपये के इस आईपीओ के लिए सबसे अधिक बोली नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) ने लगाई है और उनके लिए आरक्षित हिस्सा पूरा भर चुका है। ओवरऑल यह इश्यू दो दिन में 0.55 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। वहीं ग्रे मार्केट की बात करें तो प्राइस बैंड के अपर प्राइस के हिसाब से 24 रुपये की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर ट्रेड हो रहे हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फाइनेंशियल्स और फंडामेंटल्स के आधार पर निवेश का फैसला लेना चाहिए। नीचे कैटेगरीवाइज आईपीओ सब्सक्रिप्शन की डिटेल्स दी जा रही है।
क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (QIB)- 0.37 गुना
नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII)-1.20 गुना
एचएमए एग्रो के 480 करोड़ रुपये के आईपीओ में 24 जून तक पैसे लगा सकेंगे। इस इश्यू के तहत 150 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी होंगे और 330 करोड़ रुपये के शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो (OFS) के तहत बिक्री होगी। 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले शेयरों के लिए 555-585 रुपये का प्राइस बैंड और 25 शेयरों का लॉट फिक्स किया गया है। आईपीओ की सफलता के बाद शेयरों का अलॉटमेंट 29 जून को फाइनल होगा और बीएसई-एनएसई पर लिस्टिंग 4 जुलाई को होगी। नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।
यह एक फैमिली बिजनेस है जिसमें भाई गुलजार अहमद और वाजिद अहमद फाउंडिंग प्रमोटर्स हैं। गुलजार अहमद चेयरमैन और पूर्णकालिक निदेशक हैं, जबकि वाजिद अहमद बोर्ड के एमडी हैं। एचएमए एग्रो बफैलो मीट, नेचुरल प्रोडक्ट्स, सब्जियों और सीरेल्स के कारोबार में है। यह बफैलो मीट यानी बीफ एक्सपोर्ट करने वाली देश की बड़ी कंपनियों में शुमार है। बफैलो मीट के एक्सपोर्ट में इसकी 10 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है। यह ब्लैक गोल्ड, कामिल और एचएमए के ब्रांड नाम से अपने प्रोडक्ट्स की बिक्री करती है। इसके प्रोडक्ट्स का निर्यात 40 से अधिक देशों में होता है।
अलीगढ़, मोहाली, आगरा और पारभानी में इसके चार फुल्ली इंटीग्रेटेड पैकेज्ड मीट प्रोसेसिंग प्लांट्स हैं और अब यह हरियाणा मं एक और ऐसा प्लांट खोलने की तैयारी मे है। वहीं उन्नाव में एक और प्लांट के लिए यह जमीन ले रही है। इसके अलावा कंपनी के पास जयपुर और मानेसर में सेकंडरी लेवल की दो मीट प्रोसेसिंग यूनिट है। कंपनी की करीब 90 फीसदी बिक्री निर्यात के रूप में है।
इसके वित्तीय सेहत की बात करें को हर वित्त वर्ष में इसका मुनाफा बढ़ा है। वित्त वर्ष 2019 में इसे 31.17 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था। अगले ही वित्त वर्ष में यह बढ़कर 45.90 करोड़, फिर वित्त वर्ष 2021 में 71.60 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2022 में 117.62 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
प्री-आईपीओ नोट में मारवाड़ी फाइनेंशियल सर्विसेज के एनालिस्ट ने कहा कि कंपनी का कारोबार कई देशों में फैला हुआ है और इसका कस्टमर बेस मजबूत है। भविष्य में ग्रोथ की संभावनाओं को देखते हुए एनालिस्ट का मानना है कि यह इश्यू उचित वैल्यूएशन पर उपलब्ध है और इस कारण इसे सब्सक्राइब रेटिंग दी है।
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