NSE और हीरो मोटर्स IPO के GMP में बड़ी गिरावट, निवेशकों को किस बात का है डर?

NSE और Hero Motors IPO के GMP में शुरुआती तेजी के बाद बड़ी गिरावट आई है। NSE का प्रीमियम ₹310 से घटकर ₹145 और Hero Motors का ₹24 से ₹8 रह गया। जानिए GMP गिरने की वजह और निवेशकों की प्रमुख चिंताएं।

अपडेटेड Sep 17, 2026 पर 6:08 PM
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NSE IPO का GMP शुरुआत में ₹310 था, जो 17 सितंबर की घटकर करीब ₹145 रह गया।

IPO बाजार में इस समय NSE और Hero Motors के इश्यू चर्चा में हैं। दोनों IPO को लेकर ग्रे मार्केट में जबरदस्त उत्साह दिखा। लेकिन फिर इनके GMP यानी Grey Market Premium में तेज गिरावट देखने को मिली। बेशक GMP अंतिम लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं होती। मगर इससे निवेशकों के उत्साह और आईपीओ की डिमांड का मोटा अंदाजा मिलता है।

NSE IPO का GMP क्यों गिरा?

इनवेस्टरगेन के मुताबिक, NSE IPO का GMP शुरुआत में ₹310 था, जो 17 सितंबर की घटकर करीब ₹145 रह गया। यानी इसमें लगभग 53% की गिरावट आई। ₹1,785 के अपर प्राइस बैंड के मुकाबले ₹145 का GMP करीब 8% के संभावित प्रीमियम का संकेत देता है।


GMP में गिरावट की कई वजहें हैं। पहली बात की NSE का IPO करीब ₹22,562 करोड़ का है और यह पूरी तरह Offer for Sale (OFS) है। यानी इस इश्यू से मिलने वाला पैसा NSE को नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे। इतना बड़ा इश्यू होने का मतलब है कि ज्यादातर लोगों को अलॉटमेंट मिलने की संभावना रहती है। इसलिए ग्रे मार्केट में अब ज्यादा उत्साह नहीं दिख रहा।

दूसरी बड़ी चिंता NSE की कमाई को लेकर है। कंपनी की आमदनी में ट्रांजैक्शन चार्ज की बड़ी हिस्सेदारी है और खासकर डेरिवेटिव्स कारोबार में रेगुलेटरी बदलावों का असर पड़ा है। FY26 में NSE का रेवेन्यू और मुनाफा दोनों घटा था। इससे ग्रे मार्केट में वैल्यूएशन को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

इसके अलावा, बाजार का मौजूदा माहौल भी पूरी तरह मजबूत नहीं है। अमेरिकी फेड की दरों से जुड़ा रुख, कच्चे तेल की कीमत और हाल की बाजार गिरावट ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर असर डाला है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भी इन फैक्टर्स को भारतीय बाजार के मौजूदा सतर्क माहौल की वजहों में शामिल किया है। ऐसे में NSE की कमाई पर आगे भी असर पड़ सकता है।

Hero Motors IPO का GMP भी फिसला

हीरो ग्रुप की कंपनी Hero Motors IPO का GMP भी शुरुआती उछाल के बाद कमजोर हुआ है। 13 सितंबर को इसका GMP करीब ₹24 था, जो 17 सितंबर को घटकर करीब ₹8 रह गया। यानी चार दिनों में प्रीमियम लगभग 66.7% नीचे आया है। ₹84 के अपर प्राइस बैंड पर ₹13 का GMP करीब 9.5% संभावित प्रीमियम का संकेत देता है।

Hero Motors के मामले में एक अहम बात QIB यानी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स की कमजोर शुरुआती मांग है। 17 सितंबर की सुबह तक IPO कुल 2.20 गुना सब्सक्राइब हुआ था, लेकिन QIB हिस्सा सिर्फ 0.01 गुना भरा था। इसके मुकाबले रिटेल हिस्सा 3.49 गुना और NII हिस्सा 2.10 गुना सब्सक्राइब हुआ।

यानी IPO को रिटेल और NII निवेशकों से अच्छी मांग मिल रही थी, लेकिन संस्थागत निवेशकों की शुरुआती भागीदारी कम रही। ग्रे मार्केट में इस तरह की डिमांड को लेकर धारणा GMP पर असर डाल सकती है। बाद में सब्सक्रिप्शन बढ़ने पर तस्वीर बदल भी सकती है।

GMP गिरने का मतलब IPO कमजोर होना नहीं

GMP को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि यह अनऑफिशियल मार्केट का संकेतक है। इसमें ट्रेडिंग सीमित होती है और सेंटीमेंट तेजी से बदल सकता है। इसलिए GMP में ₹20-30 की गिरावट का मतलब यह नहीं है कि कंपनी के बिजनेस में उसी अनुपात में बदलाव आया है।

NSE के मामले में GMP में गिरावट के साथ बड़ा इश्यू साइज, डेरिवेटिव्स से जुड़ी रेगुलेटरी चिंताएं और वैल्यूएशन जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। वहीं Hero Motors में शुरुआती QIB डिमांड और ग्रे मार्केट सेंटीमेंट महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। हालांकि, अंतिम लिस्टिंग प्राइस का पता शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद ही चलेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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