NSE IPO: कल से खुल रहा है NSE का मेगा इश्यू! निवेश से पहले हर रिटेल निवेशक जरूर जानें ये 5 बातें

NSE IPO Important Details: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE का आईपीओ कल यानी 17 सितंबर से खुल रहा है। ₹1,700 से ₹1,785 के प्राइस बैंड वाले इस इश्यू में रिटेल निवेशक न्यूनतम ₹14,280 से बोली लगा सकते हैं। जून तिमाही में ₹3,121 करोड़ का मुनाफा कमाने वाले NSE के शेयर अपने खुद के एक्सचेंज पर नहीं बल्कि BSE पर लिस्ट होंगे। निवेश से पहले ये है 5 जरूरी बातें जो हर निवेशकों को जाननी चाहिए

अपडेटेड Sep 16, 2026 पर 11:53 AM
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जून 2026 तिमाही में NSE का ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर ₹4,560 करोड़ रहा

NSE IPO Details: निवेशकों को सालों से जिसका इंतजार था वो आखिरकार होने ही जा रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का आईपीओ कल यानी 17 सितंबर 2026 से आम रिटेल निवेशकों के लिए खुल रहा है। अगर आप भी इस आईपीओ में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो दांव लगाने से पहले इसके प्राइस बैंड, अलॉटमेंट, लिस्टिंग और जोखिमों से जुड़ा हर गणित समझ लें। जानिए NSE आईपीओ से जुड़ी कौन सी बातें आपके लिए जानना जरूरी हैं।

1. NSE IPO की जरूरी डिटेल्स 

आईपीओ खुलने-बंद होने की तारीख: 17 सितंबर- 21 सितंबर 2026


शेयर अलॉटमेंट और लिस्टिंग: 22 और 24 सितंबर को।

प्राइस बैंड: ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर।

लॉट साइज और न्यूनतम निवेश: न्यूनतम 8 शेयर। ऊपरी प्राइस बैंड (₹1,785) के हिसाब से एक लॉट के लिए रिटेल निवेशकों को कम से कम ₹14,280 का निवेश करना होगा।

ऑफर फॉर सेल(OFS): यह पूरा आईपीओ ऑफर फॉर सेल (OFS) है। इसका मतलब है कि मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेच रहे हैं और आईपीओ से मिलने वाला पैसा NSE की कंपनी के पास नहीं जाएगा।

2. बाजार में कितनी मजबूत है NSE की पकड़?

एनएसई का बिजनेस और मार्केट शेयर बेहद मजबूत है:

कैश मार्केट टर्नओवर: वित्त वर्ष 2026 में 92.99% हिस्सा।

इक्विटी फ्यूचर्स: 99.79% की एकछत्र हिस्सेदारी।

इक्विटी ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर: 74.71% मार्केट शेयर।

वित्तीय प्रदर्शन: जून 2026 तिमाही में NSE का ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर ₹4,560 करोड़ रहा जो पिछले साल ₹4,032 करोड़ था। वहीं नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹3,121 करोड़ हो गया जो पिछले साल ₹2,811 करोड़ था।

3. रिटेल निवेशक कैसे अप्लाई कर सकते हैं?

रिटेल निवेशक अपने डिमैट अकाउंट से मानक ASBA या UPI प्रोसेस के जरिए आईपीओ में बोली लगा सकते हैं। वैसे अगर इश्यू भारी ओवरसब्सक्राइब होता है, तो लॉटरी सिस्टम के कारण कम शेयर मिल सकते हैं या अलॉटमेंट नहीं भी मिल सकता है। जिन निवेशकों को अलॉटमेंट नहीं मिलता, वे लिस्टिंग वाले दिन के बाद सेकेंडरी मार्केट (BSE) से भी NSE के शेयर खरीद सकते हैं।

4. खुद के एक्सचेंज पर नहीं होगी लिस्टिंग!

नियमों के मुताबिक, कोई भी स्टॉक एक्सचेंज खुद के प्लेटफॉर्म पर अपने शेयर लिस्ट नहीं करा सकता। NSE के एमडी और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने नई दिल्ली में आईपीओ लॉन्च इवेंट के दौरान पुष्टि की कि NSE के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज(BSE) पर लिस्ट होंगे।

5. निवेश करने से पहले एक्सपर्ट्स की चेतावनी

स्टॉकिफाई के फाउंडर और सीईओ पीयूष झुनझुनवाला का कहना है कि निवेशकों को केवल शुरुआती लिस्टिंग गेन की उम्मीद में पैसा नहीं लगाना चाहिए। एक्सपर्ट का मानना है कि सिर्फ मजबूत मार्केट शेयर देखकर फैसला न लें, बल्कि कंपनी का वैल्यूएशन, रेगुलेटरी माहौल और अपना रिस्क प्रोफाइल देखकर ही लंबी अवधि के लिए फैसला करें।

NSE देश का नंबर-1 एक्सचेंज है और इसके वित्तीय आंकड़े बेहद मजबूत हैं, लेकिन ओएफएस (OFS) होने के कारण नया कैपिटल कंपनी में नहीं आ रही है। अगर आपको लिस्टिंग गेन नहीं भी मिलता है, तो लंबी अवधि के लिहाज से यह एक मजबूत पोर्टफोलियो शेयर साबित हो सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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