Senco Gold IPO : ज्वेलरी कंपनी Senco Gold के आईपीओ में आज 4 जुलाई को सब्सक्रिप्शन का पहला दिन है। इस इश्यू को निवेशकों की ठीक-ठाक प्रतिक्रिया मिली है और यह अब तक 69 फीसदी सब्सक्राइब हो गया है। इश्यू को अब तक 65,28,018 शेयरों के लिए बोलियां मिली है जबकि ऑफर पर 94,18,603 शेयर हैं। इस आईपीओ में 6 जुलाई तक निवेश का मौका है। कंपनी ने इसके लिए 301-307 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। कंपनी ने 21 एंकर निवेशकों से कुल 121.49 करोड़ रुपये पहले ही जुटा लिए हैं। सेनको गोल्ड इश्यू के जरिए 405 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है।
सब्सक्रिप्शन से जुड़ी डिटेल
Senco Gold के आईपीओ में अब तक रिटेल निवेशकों ने अच्छी दिलचस्पी दिखाई है और उनके लिए रिजर्व हिस्सा पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया है। यहां हमने अलग-अलग कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों की जानकारी दी है।
क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशन बायर्स (QIB) - 0
नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) - 62 फीसदी
रिटेल इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स (RII) - 1.12 गुना
(BSE, 4 जुलाई 2023, 05:00:00 PM)
Senco Gold के आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में जबरदस्त क्रेज दिख रहा है। अनलिस्टेड मार्केट में आज यह इश्यू 124 रुपये के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। इसका मतलब है कि कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 431 रुपये के भाव पर होने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो निवेशकों को 40 फीसदी का बंपर मुनाफा होगा।
सेनको गोल्ड इश्यू से 405 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी में है। इसमें 270 करोड़ रुपए का फ्रेश इश्य और 135 करोड़ रुपए का ऑफर फॉर सेल है। ऑफर फॉर सेल में कंपनी की निवेशक SAIF पार्टनर्स इंडिया IV अपने शेयर बेच रही है। ऑफर फॉर सेल से जुटाई गई पूरी रकम SAIF पार्टनर्स इंडिया IV के पास जाएगी। जबकि फ्रेश इश्यू से जुटाया गए फंड में से 196 करोड़ रुपए का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल रिक्वायरमेंट में किया जाएगा। इसके साथ ही जनरल कॉरपोरेट कामकाज में भी इसका इस्तेमाल होगा।
सेनको गोल्ड सोने, हीरे, चांदी और प्लैटिनम की ज्वैलरी बनाने और बेचने का काम करती है। Senco Gold पूर्वी भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। इसका बिजनेस 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 96 शहरों में फैला हुआ है। कंपनी इन शहरों में अपने दम पर 75 स्टोर और फ्रेंचाइजी के माध्यम से 61 स्टोर चलाती है। कंपनी का लगभग 85 प्रतिशत रेवेन्यू गोल्ड ज्वैलरी से आता है। वहीं, लगभग 10 फीसदी राजस्व हीरे के आभूषणों से आता है। कंपनी के खजाने में सबसे ज्यादा योगदान पश्चिम बंगाल का है।