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PE फंडिंग वाली कंपनियों के शेयरों का रिटर्न खराब, लिस्टिंग डे रिटर्न भी कम

मनीकंट्रोल की स्टडी के नतीजें बताते हैं कि उन कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन लिस्टिंग के दिन और उसके बाद के 12 महीनों में ज्यादा बेहतर रहा है, जिनमें पीई फंडों का निवेश नहीं है। इसके लिए वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्श 2025 के बीच आई 218 आईपीओ का एनालिसिस किया गया

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jul 01, 2025 पर 6:27 PM
PE फंडिंग वाली कंपनियों के शेयरों का रिटर्न खराब, लिस्टिंग डे रिटर्न भी कम
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि पीई फंडिंग और गैर-पीई फंडिंग वाली कंपनियों के शेयरों के रिटर्न में इस फर्क की कई वजहें हो सकती हैं।

कई इनवेस्टर्स को लगता है कि पीई फंडों के निवेश वाली कंपनियों के शेयरों में लिस्टिंग के बाद अच्छी तेजी दिखती है। लेकिन, मनीकंट्रोल की स्टडी के नतीजें बताते हैं कि उन कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन लिस्टिंग के दिन और उसके बाद के 12 महीनों में ज्यादा बेहतर रहा है, जिनमें पीई फंडों का निवेश नहीं है। इसके लिए वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्श 2025 के बीच आई 218 आईपीओ का एनालिसिस किया गया। एनालिसिस के नतीजें बताते हैं कि उन कंपनियों के शेयरों ने लिस्टिंग के दिन औसत 32.86 फीसदी का रिटर्न दिया, जिनमें पीई फंडों का निवेश नहीं था। इसके मुकाबले पीई फंडिंग वाली कंपनियों के शेयरों ने लिस्टिंग के दिन औसत 21.48 फीसदी का रिटर्न दिया।

12 महीनों के रिटर्न में भी पिछड़े पीई फंडिंग वाली कंपनियों के शेयर

12 महीनों में रिटर्न को देखने पर यह फर्क और बढ़ जाता है। इस दौरान पीई निवेश वाली कंपनियों के शेयरों का औसत रिटर्न 50.24 फीसदी रहा, जबकि उन कंपनियों के शेयरों का औसत रिटर्न 75.32 फीसदी रहा जिनमें पीई फंडों का निवेश नहीं था। अगर मीडियन लिस्टिंग डे रिटर्न की बात की जाए तो गैर-पीई फंडिंग वाले शेयरों का रिटर्न 20.03 फीसदी रहा, जबकि पीई फंड वाले शेयरों का रिटर्न 11.44 फीसदी रहा। 12 महीनों में गैर-पीई फंडिंग वाली कंपनियों के शेयरों का मीडियन रिटर्न 47.49 फीसदी और पीई फंडिंड वाले शेयरों का मीडियन रिटर्न 31.78 फीसदी रहा।

शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों पैमाने पर प्रदर्शन कमजोर

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