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Waterways Leisure IPO : वॉटरवेज लेजर के IPO में रेड फ्लैग्स की भरमार, जानिए क्या इसमें लगाना चाहिए पैसा

Waterways Leisure IPO : अनुज सिंघल ने कहा कि भारत में क्रूज का कल्चर नहीं है। देश में क्रूज कंपनियों की ग्रोथ की संभावना बहुत कमजोर है। कंपनी के प्रदर्शन पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का रेवेन्यू 2% गिरा था। एबिटडा तो 46% गिरकर 117 करोड़ पर आ गया था। 85% ऑक्यूपेंसी और 12,000 के एवरेज रेवेन्यू पर भी मार्जिन काफी खराब रहा था

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Jun 25, 2026 पर 1:59 PM
Waterways Leisure IPO : वॉटरवेज लेजर के IPO में रेड फ्लैग्स की भरमार, जानिए क्या इसमें लगाना चाहिए पैसा
Waterways Leisure IPO : सब्सक्रिप्शन पर नजर डालें तो यह आईपी अभी तक कुल 51% ही भरा। जिसमें से रिटेल हिस्सा 2.34 गुना भरा है। एनआरआई, एनआईआई का हिस्सा 32 फीसदी भरा है। अब तक क्यूआईबी निवेश जीरो है

Waterways Leisure IPO : वॉटरवेज लेजर (Waterways Leisure) के IPO में निवेश का आज आखिरी दिन है। 2 दिन के सब्सक्रिप्शन पर नजर डालें तो यह आईपीओ कुल 51 फीसदी भरा है। इसमें रिटेल का हिस्सा 2.34 गुना और NIIs का हिस्सा 32 फीसदी भरा है। जबकि, QIBs इससे नदारद हैं। ऐसे में क्या आपको इस IPO में पैसा लगाना चाहिए, क्या है इस कंपनी से जुड़ी दिक्कतें? ये बता रहे हैं CNBC-आवाज के मैनेजिंग एडिटर,अनुज सिंघल।

अनुज सिंघल ने कहा कि उन्होंने कई आईपीओ देखे हैं। लेकिन इससे ज्यादा रेड फ्लैग्स बहुत कम आईपीओ में दिखे हैं। मतलब यह है कि यह एक ऐसा आईपीओ है जिसमें रेड फ्लैग्स की भरमार है। सबसे बड़ा रेड फ्लैग यह है कि आईपीओ आते-आते इसमें सिर्फ बैंकर रह गया जो पहले तीन थे। यानी कंपनी ने जब आईपीओ के लिए डीआरएचपी फाइल किया था तब तीन मर्चेंट बैंकर थे और आईपीओ आते-आते एक मर्चेंट बैंकर रह गया है। सेबी का रूल है अगर प्रॉफिटेबिलिटी में बहुत ज्यादा वोलैटिलिटी हो तो आईपीओ का सिर्फ 10% हिस्सा रिटेल के लिए होता है। ऐसे में इस आईपीओ का सिर्फ 10% हिस्सा रिटेल के लिए है और इसके लिए रिटेल के ओवर सब्सक्रिप्शन के कोई मायने नहीं है। यह एक बहुत छोटा सा हिस्सा है। अगर इसका ओवर सब्सक्रिप्शन हो गया तो भी क्या फर्क पड़ता है ? ईमानदारी से बोलें तो इस आईपीओ में फंसने का रिस्क है।

अब तक के सब्सक्रिप्शन पर नजर डालें तो यह आईपी अभी तक कुल 51% ही भरा। जिसमें से रिटेल हिस्सा 2.34 गुना भरा है। एनआरआई, एनआईआई का हिस्सा 32 फीसदी भरा है। अब तक क्यूआईबी निवेश जीरो है। हो सकता है आखिरी दिन में यह हिस्सा भर जाए लेकिन क्यूआईबी और एचएनआई साफ तौर पर इस आईपीओ से दूरी बनाए हुए हैं।

इसके अलावा कई और कारण हैं जिनकी वजह से यह आईपीओ अच्छा नहीं लग रहा है। इसमें ओनरशिप में बदलाव हुआ है। पहले इसका नाम जेल क्रूज वगैरह कुछ था। बाद में सिर्फ ब्रांड बेचा गया। शिप मर्चेंट शिप ब्रांड अलग से बेचा गया। शिप अलग से बेचा गया। ऐसी बहुत सी चीजें हुई। किस लेवल पर यह डील हुई उसके मुकाबले किस लेवल पर आईपीओ आ रहा है। यह सब तो एक अलग ही कहानी है। वह अगर आप एक डीआरएचपी पढ़ेंगे तो आपको समझ में आएगा।

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