BJP के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नसीहत देते हुए, नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने को कहा। पुरी ने शराब घोटाला मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी और रिमांड के खिलाफ याचिका खारिज करने के हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए ये मांग की। मंत्री ने दावा किया कि केजरीवाल को नवंबर 2023 और मार्च 2024 के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नौ समन जारी किए थे। वह पिछले छह महीनों में किसी न किसी बहाने से इन नोटिसों से बचते रहे।
पुरी ने एक बयान में कहा, "अब समय आ गया है कि अरविंद केजरीवाल नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दें।" उन्होंने कहा कि कानून ने उन्हें पकड़ लिया है और अदालत ने "निर्दयी" होकर ED की उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए रिमांड को बरकरार रखा है।
पुरी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) का मुख्यमंत्री पद पर बने रहना ''बेशर्मी'' है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए और किसी और को दिल्ली सरकार चलाने देना चाहिए।
हाई कोर्ट ने AAP और केजरीवाल को दिखाया आईना: BJP
वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी मंगलवार को कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने आबकारी घोटाले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी (AAP) को आईना दिखाया है और उनके ‘‘झूठ’’ को उजागर किया है।
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि केजरीवाल को अब जेल से सरकार चलाने की अपनी ‘‘जिद’’ छोड़ देनी चाहिए और तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘अगर केजरीवाल और उनकी पार्टी अब भी अड़े रहे तो राष्ट्रपति के पास सरकार को बर्खास्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।’’
AAP ने बताया अब तक की सबसे बड़ी 'राजनीतिक साजिश'
AAP नेताओं ने BJP पर आरोप लगाया है कि वह केजरीवाल को जेल भेजकर पार्टी और केजरीवाल को खत्म करने की कोशिश कर रही है और फिर विधायकों को तोड़कर दिल्ली में उनकी सरकार गिराना चाहती है।
हाई कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए, AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि तथाकथित शराब घोटाला मामला मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं था, बल्कि उन्हें और दिल्ली और पंजाब में पार्टी शासित सरकारों को खत्म करने के लिए केजरीवाल के खिलाफ "सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश" थी।